बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर रॉयल क्राफ्ट्स एग्जीबिशन की भव्य शुरुआत का साक्षी बना, जो भारत की समृद्ध हस्तकला का एक विशिष्ट उत्सव है। यह प्रदर्शनी फिक्की फ्लो जयपुर चैप्टर द्वारा अध्यक्ष रघुश्री पोद्दार के नेतृत्व में आयोजित की गई, जिसमें वल्र्ड क्राफ्ट्स काउंसिल-एशिया पैसिफिक रीजन (ङ्खष्टष्ट-्रक्कक्र) और गारमेंट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (त्रश्व्रक्र) का सहयोग प्राप्त हुआ।
यह भव्य प्रदर्शनी 16 दिसंबर 2024 को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (क्रढ्ढष्ट), झालाना डूंगरी, जयपुर के फ्रंट लॉन में शुरू हुई। इस आयोजन ने कारीगरों, डिज़ाइनरों और हस्तकला प्रेमियों को एक साथ लाकर भारत की जीवंत परंपराओं, कला और संस्कृति का उत्सव मनाने का अवसर प्रदान किया।
सुबह 10:30 बजे आयोजित उद्घाटन समारोह में राजस्थान की माननीय उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर फ्लो जयपुर चैप्टर की संस्थापक नीता बूचरा, प्रतिष्ठित ङ्खष्टष्ट प्रतिनिधि, फिक्की फ्लो के सदस्य और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे। अपने संबोधन में दिया कुमारी ने भारत की पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया और देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने वाले प्रतिभाशाली कारीगरों की सराहना की।
दिनभर, प्रदर्शनी स्थल पर उत्साह का माहौल रहा, जहां आगंतुकों ने वस्त्र, होम फर्निशिंग, आभूषण, फर्नीचर, हस्तशिल्प और कपड़ों जैसी विभिन्न श्रेणियों में भारत की सबसे बड़ी क्यूरेटेड क्राफ्ट्स प्रदर्शनी का आनंद लिया। इस विशेष प्रदर्शनी में 40 प्रसिद्ध ब्रांडों ने अपनी अनूठी रचनाओं का प्रदर्शन किया, जिनमें परंपरा और आधुनिकता का बेहतरीन मेल देखने को मिला। कार्यक्रम में 40 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया और भारत की अतुलनीय हस्तकला का अनुभव किया।
दिन का प्रमुख आकर्षण शाम 3:00 बजे आयोजित एक टॉक शो रहा, जिसमें वस्त्र डिज़ाइन की दुनिया के प्रसिद्ध व्यक्तित्व गौरांग शाह ने भाग लिया। अपने सत्र में, उन्होंने जमदानी बुनाई, इकत कला और पारंपरिक कढ़ाई तकनीकों की बारीकियों पर प्रकाश डाला। उनकी प्रस्तुतियां दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गईं और भारतीय वस्त्र परंपराओं की स्थायी विरासत और आधुनिक प्रासंगिकता को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया।
रॉयल क्राफ्ट्स का पहला दिन विरासत और नवाचार के असाधारण उत्सव के रूप में यादगार बना। यह आयोजन भारतीय हस्तकला को वैश्विक मंच पर स्थापित करने, संवाद को प्रोत्साहित करने और कहानियां साझा करने का एक जीवंत मंच बना।

