भारत के प्रधानमंत्री पीएम मोदी की पिछले दिनों जॉर्डन यात्रा आने वाले समय में कुछ हद तक सार्थक सिद्ध होने वाली है। इस यात्रा से दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को मजबूती मिली है और पांच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए है। जो राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 37 वर्षों में जॉर्डन की यह पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई इस यात्रा से भारत-जॉर्डन साझेदारी को नई गति मिली है और दोनों देशों के बीच विश्वास तथा आपसी समझ बढ़ी है। समझौते नवीकरणीय ऊर्जा, जल संसाधन प्रबंधन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, डिजिटल समाधान और पेट्रा व एलोरा के बीच जुड़ाव से संबंधित हुए हैं। इसके अलावा भारत और जॉर्डन के बीच तकनीकी क्षेत्र में भी मजबूत संबंध बन रहे हैं। जॉर्डन में भारत-जॉर्डन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई है, जो अल-हुसैन टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचटीयू) में स्थित है। यह केंद्र पूरी तरह से भारत द्वारा फंडेड है और इसमें अत्याधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, जिसमें सुपर कंप्यूटर परम शावक और अन्य उन्नत प्रशिक्षण सुविधाएं शामिल हैं। भारत सरकार साइबर सुरक्षा, वेब विकास, मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में मास्टर ट्रेनर कोर्स आयोजित करती है। भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल-हुसैन के साथ व्यापक बातचीत की। जॉर्डन के डिजिटल भुगतान प्रणाली को भारत के यूनाइटेड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) से जोडऩे की भी बात की। जॉर्डन भारत के लिए उर्वरकों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है और दोनों देशों की कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। ऐसे में भारत में फॉस्फेटिक उर्वरकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जॉर्डन में और निवेश हो सकता है। आने वाले समय में संभव है कि भारत और जॉर्डन के बीच व्यापार के नए अध्याय की शुरुआत हो सकेगी।




