बिजनेस रेमेडीज/New Delhi(आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें देश में पेट्रोलियम, कच्चे तेल, गैस, बिजली और उर्वरक की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद देश में आवश्यक ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति पूरी तरह सुचारू बनी रहे और आम उपभोक्ताओं तथा उद्योगों पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
- निर्बाध आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स पर जोर
बैठक में देशभर में ईंधन और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मजबूत और कुशल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के माध्यम से आपूर्ति शृंखला को और अधिक सुदृढ़ किया जाए, ताकि किसी भी संभावित व्यवधान की स्थिति में तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जा सके। अधिकारियों ने मौजूदा भंडार, आयात स्थिति और वितरण नेटवर्क की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की और आश्वस्त किया कि देश में आवश्यक ईंधन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। साथ ही, रिफाइनरी संचालन और परिवहन तंत्र को भी पूरी क्षमता के साथ सक्रिय रखा गया है। - ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक तैयारी
बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए सरकार ऊर्जा सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क और सक्रिय नजर आ रही है। बैठक में दीर्घकालिक रणनीतियों पर भी चर्चा की गई, जिसमें पर्याप्त भंडारण क्षमता बनाए रखना और आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण शामिल है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में Middle East पर अपनी निर्भरता कम करते हुए America, Russia और African देशों से तेल और गैस आयात बढ़ाया है। अधिकारियों के अनुसार, अब देश का लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात खाड़ी क्षेत्र के बाहर के स्रोतों से हो रहा है, जो ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही, एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक स्रोतों से आयात सुनिश्चित करना शामिल है। - वैश्विक संकट और समुद्री मार्गों पर चिंता
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है, जिसका सीधा असर तेल और गैस की कीमतों तथा आपूर्ति पर पड़ सकता है। बैठक में विशेष रूप से Hormuz Strait जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में संभावित व्यवधान को लेकर चिंता व्यक्त की गई, क्योंकि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा संभालता है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में Iran के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से बातचीत में भी क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है।
सरकार ने एलपीजी आपूर्ति को लेकर भी आश्वस्त किया है कि देश में फिलहाल कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति जारी है। सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और आवश्यकतानुसार त्वरित निर्णय लेने के लिए तैयार है, ताकि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सके।

