बिजनेस रेमेडीज/New Delhi (आईएएनएस)। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने रविवार को कहा कि भारत Middle East में तनाव के आर्थिक प्रभाव को प्रबंधित करने के लिए तेज और संतुलित कदम उठा रहा है और आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित रखने के लिए सरकार और उद्योग दोनों साथ मिलकर काम कर रहे हैं। CII के महानिदेशक Chandrajit Banerjee ने कहा कि भारत ने इस चुनौतीपूर्ण दौर में मजबूत स्थिति से प्रवेश किया है। उन्होंने कहा कि वर्षों के आर्थिक सुधारों और आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने से देश की बाहरी झटकों से निपटने की क्षमता में सुधार हुआ है। Banerjee ने कहा, “सरकार ने संकट के प्रभाव को कम करने के लिए कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाना, एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करना, निर्यात को समर्थन देना और मुद्रा स्थिरता सुनिश्चित करना जैसे कई निर्णायक कदम उठाए हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि यह स्थिति भारत के लिए सतत और आत्मनिर्भर ऊर्जा प्रणालियों की ओर अपने ट्रांजिशन को गति देने की आवश्यकता को दिखाती है। Banerjee ने कहा, “नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, जैव ईंधन और ऊर्जा दक्षता में निवेश न केवल जलवायु लक्ष्य हैं, बल्कि अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर निर्भरता कम करने की महत्वपूर्ण रणनीतियां भी हैं।”
साथ ही, भारतीय उद्योग ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर, आपूर्ति शृंखला की दक्षता में सुधार करके और रोजगार के अवसरों को बचाने के लिए कदम उठाकर सक्रिय रूप से स्थिति के अनुकूल ढल रहा है। CII ने कहा कि वह आपूर्ति शृंखला जोखिमों की निगरानी करने, कमी को दूर करने और वास्तविक समय पर प्रतिक्रिया प्रदान करने के लिए सरकार और विभिन्न क्षेत्रों के साथ मिलकर काम कर रही है।
CII ने कहा कि स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन भारत के पास प्रभावी ढंग से जवाब देने और अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने की क्षमता है।

