Sunday, July 12, 2026 |
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तेल निर्भरता घटाने के लिए सरकार का ईवी, खनिजों पर जोर

वैश्विक तेल उतार-चढ़ाव के बीच सरकार सक्रिय

by Business Remedies
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रूपये 10,900 करोड़ की पीएम ई-ड्राइव योजना को बढ़ावा
जयपुर | बीआर न्यूज नेटवर्क | पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े महत्वपूर्ण खनिजों के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। देश में बढ़ती ऊर्जा मांग और आयात बिल को नियंत्रित करने के लिए यह रणनीति अहम मानी जा रही है, जिससे दीर्घकाल में ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को मजबूती मिलेगी।

ईवी अपनाने के लिए सरकार का बड़ा प्रोत्साहन
भारी उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को गति देने और सप्लाई चेन से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने रूपये 10,900 करोड़ की पीएम ई-ड्राइव योजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है। इलेक्ट्रिक दोपहिया सेगमेंट को 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाया गया है, जबकि ई-रिक्शा और ई-कार्ट सहित इलेक्ट्रिक तीनपहिया सेगमेंट को 31 मार्च 2028 तक विस्तार दिया गया है। इससे ईवी अपनाने की रफ्तार बनी रहेगी और प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ लगातार मिलता रहेगा।

रेयर अर्थ मैग्नेट से मजबूत होगी सप्लाई चेन
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रूपये 7,280 करोड़ की लागत से सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) निर्माण योजना को मंजूरी दी है। इसका लक्ष्य भारत में 6,000 एमटीपीए की निर्माण क्षमता स्थापित करना है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर की सप्लाई चेन मजबूत होगी। साथ ही यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘नेट जीरो 2070’ जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी समर्थन देगा। सरकार इस योजना को तेजी से लागू करने के लिए उद्योग और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार संवाद कर रही है।

घरेलू मैन्युफैक्चरिंग से घटेगी आयात निर्भरता
सरकार फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम के जरिए ईवी निर्माण में घरेलू वैल्यू एडिशन बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसके तहत टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से चलाई जा रही है और कंपनियों के साथ प्री-बिड बैठकें भी आयोजित की गई हैं। पीएम ई-ड्राइव, आरईपीएम और फेज्ड मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम के संयुक्त प्रभाव से देश में मजबूत ईवी इकोसिस्टम तैयार होगा।
इससे मैन्युफैक्चर्स, एमएसएमई और कंपोनेंट सप्लायर्स को नए अवसर मिलेंगे और उपभोक्ताओं को सस्ते, सुलभ और भरोसेमंद इलेक्ट्रिक वाहन मिल सकेंगे।



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