Wednesday, June 17, 2026 |
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भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने जारी किया 10 साल का रोडमैप

भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने के लिए 10 वर्षीय रोडमैप जारी

by Business Remedies
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नई दिल्ली | एजेंसी | NITI Aayog के Frontier Tech Hub ने भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा रोडमैप जारी किया है। “Future of India’s Semiconductor Industry” नामक यह 10 वर्षीय रोडमैप भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में तैयार किया गया है।

शुक्रवार को केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री Nirmala Sitharaman और रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने इस रोडमैप को लॉन्च किया। इस मौके पर NITI Aayog के उपाध्यक्ष Ashok Kumar Lahiri भी मौजूद रहे। NITI Aayog ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि फ्रंटियर टेक्नोलॉजी में नेतृत्व कुछ वर्षों में हासिल नहीं होता, बल्कि इसके लिए लंबी अवधि की योजना, लगातार क्षमता निर्माण और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समय से पहले निवेश करना जरूरी होता है। यही दिशा यह रोडमैप तय करता है।

पोस्ट में आगे कहा गया है कि रोडमैप में भारत के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत 2035 तक देश में 120 से 150 अरब डॉलर का सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने की योजना है। इसमें डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग, कंपाउंड सेमीकंडक्टर्स और अन्य उभरते क्षेत्रों में अवसरों की पहचान की गई है। NITI Aayog का कहना है कि भारत अब केवल शुरुआती इकोसिस्टम तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब वह इस इकोसिस्टम को और गहरा और मजबूत बनाने के चरण में प्रवेश कर चुका है।

Ashok Kumar Lahiri ने कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने में उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से प्रगति की है। हालांकि, विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ा रणनीतिक जोखिम ‘ब्लैक-बॉक्स टेक्नोलॉजी’ पर बढ़ती आयात निर्भरता है।

ऐसे में तकनीकी संप्रभुता की शुरुआत इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर से होनी चाहिए, जहां सेमीकंडक्टर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग, मोबिलिटी, ऊर्जा, संचार और डिजिटल सेवाओं जैसी महत्वपूर्ण इंडस्ट्री की रीढ़ बनते हैं। Ashok Kumar Lahiri ने आगे कहा कि भारत एक साथ पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। इसलिए देश को कुछ रणनीतिक क्षेत्रों पर गहराई से काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि रोडमैप इस बात को स्वीकार करता है कि भारत को डिजाइन, एडवांस पैकेजिंग और कंपाउंड सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में अपनी ताकत विकसित करनी होगी, जहां वह वैश्विक वैल्यू चेन में बड़ी छलांग लगा सकता है।

Ashok Kumar Lahiri ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन, शुरुआती निवेश और America, Japan तथा Europe के साथ बढ़ती साझेदारी के जरिए मजबूत गति हासिल कर चुका है। अब अगले 10 साल इस गति को स्थायी राष्ट्रीय क्षमता में बदलने के लिए बेहद अहम होंगे। उन्होंने कहा कि यह रोडमैप केवल रणनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लागू करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें अगले दशक के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं, जरूरी नीतिगत समर्थन और उन क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां भारत वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है।



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