नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता बढक़र 300 गीगावाट से अधिक हो गई है, यह देश की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता 552 गीगावाट का करीब 54 प्रतिशत है
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक देश की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता बढक़र 300 गीगावाट से अधिक हो गई है। यह देश की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता 552 गीगावाट का करीब 54 प्रतिशत है। सरकार के अनुसार, सौर और पवन ऊर्जा के साथ घरेलू विनिर्माण क्षमता में बढ़ोतरी तथा हरित हाइड्रोजन मिशन देश को आत्मनिर्भर ऊर्जा तंत्र की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
सौर ऊर्जा बनी स्वच्छ ऊर्जा विस्तार की मुख्य ताकत
भारत में सौर ऊर्जा क्षमता वर्ष 2014 में केवल 2.8 गीगावाट थी, जो अब बढक़र करीब 165 गीगावाट हो गई है। इसी तरह पवन ऊर्जा क्षमता भी 2014 के 21 गीगावाट से बढक़र 58 गीगावाट से अधिक हो गई है। वर्ष 2025-26 के दौरान देश में रिकॉर्ड 55.29 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता स्थापित की गई, जिसमें 44.6 गीगावाट सौर ऊर्जा और 6 गीगावाट पवन ऊर्जा का योगदान रहा।
500 गीगावाट लक्ष्य का 60 प्रतिशत पूरा
भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य का करीब 60 प्रतिशत पहले ही पूरा कर लिया है। सरकार का लक्ष्य स्वच्छ ऊर्जा क्षमता के विस्तार के साथ देश में आत्मनिर्भर और टिकाऊ ऊर्जा तंत्र तैयार करना है। बढ़ती क्षमता का असर ऊर्जा उत्पादन में भी दिखाई दे रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में भी तेज वृद्धि
देश में नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन वर्ष 2014-15 के 190.96 अरब यूनिट से बढक़र वर्ष 2025-26 में 477.79 अरब यूनिट हो गया है। स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते निवेश और क्षमता विस्तार के साथ भारत बिजली उत्पादन में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
घरेलू विनिर्माण और हरित हाइड्रोजन पर जोर
सौर ऊर्जा क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत उच्च क्षमता वाले घरेलू मॉड्यूल पर जोर दिया जा रहा है। सौर पीवी मॉड्यूल के लिए स्वीकृत मॉडल और विनिर्माताओं की सूची के तहत पंजीकृत क्षमता 2014 के 2.3 गीगावाट से बढक़र 200 गीगावाट के आंकड़े को पार कर गई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के माध्यम से बड़े पैमाने पर औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और भारत को हरित हाइड्रोजन तथा उससे बनने वाले उत्पादों के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

