जयपुर | चारु भाटिया
ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले डॉ. संदीप गर्ग आज एडवांस्ड जॉइंट रिप्लेसमेंट, स्पोर्ट्स इंजरी मैनेजमेंट और जटिल ट्रॉमा केयर के विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर से एमबीबीएस और एमएस (ऑर्थोपेडिक्स) करने के बाद उन्होंने अमेरिका के जॉनसन एंड जॉनसन (J&J) इंस्टीट्यूट से आर्थ्रोप्लास्टी और आर्थ्रोस्कोपी में फेलोशिप तथा आईओए फेलोशिप के तहत शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस विशेष बातचीत में उन्होंने अपने सफर, ऑर्थोपेडिक्स में आए बदलाव, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका तथा हड्डियों के स्वास्थ्य को लेकर जरूरी जानकारियां साझा कीं।
प्रश्न: आप एपेक्स हॉस्पिटल्स, मालवीय नगर, जयपुर के प्रतिष्ठित ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं। अपने अब तक के सफर और इस क्षेत्र को चुनने की प्रेरणा के बारे में बताइए।
उत्तर: मेरा जन्म राजस्थान के भरतपुर जिले के नदबई में हुआ, जहां मैंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर से एमबीबीएस और एमएस (ऑर्थोपेडिक्स) किया। अपनी सर्जिकल दक्षता को और मजबूत बनाने के लिए मैंने अमेरिका के जॉनसन एंड जॉनसन (J&J) इंस्टीट्यूट से आर्थ्रोप्लास्टी और आर्थ्रोस्कोपी में फेलोशिप की तथा वर्ष 2011 में पुणे से प्रतिष्ठित आईओए फेलोशिप के तहत शोल्डर आर्थ्रोस्कोपी का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
पिछले 15 वर्षों से मैं लगातार नई तकनीकों, नवाचार और मरीज–केंद्रित उपचार के माध्यम से ऑर्थोपेडिक सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा हूं। वर्तमान में मैं एपेक्स हॉस्पिटल्स, मालवीय नगर, जयपुर में सीनियर कंसल्टेंट (ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स इंजरी) के रूप में कार्यरत हूं। मैं इंडियन आर्थ्रोप्लास्टी एसोसिएशन कॉन्फ्रेंस में फैकल्टी भी हूं और वर्ष 2024 में मुझे YUVA Mentor Fellowship से सम्मानित किया गया। अपने करियर में मैंने 100 से अधिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की हैं और कई दुर्लभ एवं जटिल मामलों का सफल इलाज किया है।
ऑर्थोपेडिक्स चुनने की प्रेरणा मुझे अपने परिवार से मिली। मेरे पिता लंबे समय तक घुटनों की गंभीर समस्या से पीड़ित रहे और मेरे दादाजी भी हड्डियों से जुड़ी बीमारियों से जूझते थे। उन्हें दर्द और चलने–फिरने में कठिनाई झेलते देख मैंने तय किया कि मैं इस क्षेत्र में आकर लोगों को फिर से सामान्य जीवन जीने में मदद करूंगा। आज भी मेरा उद्देश्य हर मरीज को सटीक, वैज्ञानिक और कम से कम चीरा लगाने वाली आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध कराना है ताकि वे दर्द से राहत के साथ आत्मविश्वास और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्राप्त कर सकें।
प्रश्न: पिछले कुछ वर्षों में ऑर्थोपेडिक्स में काफी बदलाव आया है। आप इस परिवर्तन को कैसे देखते हैं?
उत्तर: ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। पहले अधिकांश फ्रैक्चर और हड्डियों की चोटों का इलाज केवल प्लास्टर के माध्यम से किया जाता था, जिससे मरीजों को लंबे समय तक आराम करना पड़ता था। धीरे–धीरे आधुनिक सर्जरी विकसित हुई और मरीजों की रिकवरी तेज होने लगी।
आर्थ्रोस्कोपी ने जॉइंट से जुड़ी समस्याओं के इलाज में नई दिशा दी, क्योंकि इससे बिना बड़े चीरे के सर्जरी संभव हुई और मरीज जल्दी स्वस्थ होने लगे। वहीं एमआरआई जैसी आधुनिक जांच तकनीकों ने छोटी से छोटी हड्डी और लिगामेंट की समस्या का भी शुरुआती चरण में पता लगाना आसान बना दिया।
आज रोबोटिक–असिस्टेड ऑर्थोपेडिक सर्जरी ने सर्जरी की सटीकता को और बढ़ा दिया है। इससे ऑपरेशन अधिक सुरक्षित, परिणाम बेहतर और मरीजों की रिकवरी पहले की तुलना में काफी तेज हो गई है।
प्रश्न: आपके पास सबसे अधिक किस प्रकार की ऑर्थोपेडिक समस्याओं के मरीज आते हैं?
उत्तर: घुटनों का दर्द, कंधे की समस्या, कोहनी की चोट, कूल्हे से जुड़ी बीमारियां, रीढ़ की समस्याएं और मांसपेशियों से संबंधित दर्द सबसे आम हैं। इनमें से कई मरीज केवल जीवनशैली में बदलाव, फिजियोथेरेपी, दवाइयों और सही पुनर्वास से ठीक हो जाते हैं।
हालांकि, गंभीर गठिया, लिगामेंट इंजरी, फ्रैक्चर या जोड़ों के अत्यधिक क्षतिग्रस्त होने पर सर्जरी आवश्यक हो जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगातार होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर समस्या अधिक गंभीर हो सकती है।
प्रश्न: आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक तकनीक की काफी चर्चा है। ऑर्थोपेडिक्स में इनकी क्या भूमिका है?
उत्तर: आधुनिक तकनीक ने ऑर्थोपेडिक सर्जरी को पूरी तरह बदल दिया है। AI की मदद से ऑपरेशन से पहले मरीज की शारीरिक संरचना का बेहद सटीक विश्लेषण किया जाता है, जिससे सर्जन बेहतर निर्णय ले पाते हैं।
रोबोटिक तकनीक विशेष रूप से जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी में इम्प्लांट की सही पोजिशनिंग और अलाइनमेंट सुनिश्चित करती है। इससे सर्जरी अधिक सटीक होती है और इम्प्लांट लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
इसके अलावा मिनिमली इनवेसिव सर्जरी के कारण ऑपरेशन के बाद दर्द कम होता है, खून की कमी कम होती है, अस्पताल में कम दिन रुकना पड़ता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट आते हैं।
प्रश्न: ऑस्टियोपोरोसिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी वजह क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है?
उत्तर: रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण हड्डियों का घनत्व तेजी से कम होने लगता है, इसलिए उनमें ऑस्टियोपोरोसिस अधिक देखा जाता है। लेकिन आज खराब जीवनशैली, धूप की कमी, पोषण की कमी और विटामिन–डी की कमी के कारण यह समस्या अन्य आयु वर्गों में भी बढ़ रही है।
इससे बचाव के लिए नियमित व्यायाम, वेट–बेयरिंग एक्सरसाइज, कैल्शियम और विटामिन–डी से भरपूर संतुलित आहार, पर्याप्त धूप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।
प्रश्न: बोन डेंसिटी टेस्ट (BMD) किस उम्र से कराना चाहिए?
उत्तर: सामान्यतः 50 वर्ष की आयु के बाद लोगों को बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) टेस्ट कराना शुरू कर देना चाहिए, विशेषकर यदि परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस का इतिहास हो, रजोनिवृत्ति हो चुकी हो, पहले फ्रैक्चर हुआ हो या लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाइयों का उपयोग किया गया हो।
समय पर जांच कराने से बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाती है और फ्रैक्चर होने से पहले ही इलाज शुरू किया जा सकता है।
प्रश्न: फ्रैक्चर या अन्य हड्डी संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेत क्या होते हैं? मरीज जल्दी ठीक कैसे हो सकते हैं?
उत्तर: फ्रैक्चर होने पर तेज दर्द, सूजन, प्रभावित अंग को हिलाने में कठिनाई, दबाने पर दर्द और कई बार अंग का टेढ़ा दिखाई देना जैसे लक्षण सामने आते हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि एक्स–रे या अन्य जांचों से ही होती है।
यदि दर्द लगातार बना रहे तो उसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह रीढ़ की समस्या, लिगामेंट इंजरी या अन्य ऑर्थोपेडिक रोगों का संकेत भी हो सकता है।
जल्दी स्वस्थ होने के लिए डॉक्टर की सलाह का पालन करें, पौष्टिक भोजन लें, नियमित फिजियोथेरेपी करें और घायल हिस्से पर अनावश्यक दबाव न डालें।
प्रश्न: जीवनभर हड्डियों को मजबूत रखने के लिए किन आदतों को अपनाना चाहिए?
उत्तर: अच्छी हड्डियों के लिए संतुलित आहार सबसे जरूरी है। भोजन में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और अन्य आवश्यक खनिज होने चाहिए। दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अंकुरित अनाज और सूखे मेवे नियमित रूप से खाने चाहिए।
इसके साथ सही मुद्रा (Posture), नियमित व्यायाम और शरीर में होने वाले लगातार दर्द या अकड़न को नजरअंदाज न करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
प्रश्न: हड्डियों के स्वास्थ्य से जुड़े कौन–से भ्रम सबसे ज्यादा देखने को मिलते हैं?
उत्तर: सबसे बड़ा भ्रम यह है कि हड्डियों में होने वाला हर दर्द कैंसर का संकेत होता है, जबकि अधिकांश मामलों में दर्द का कारण गठिया, मांसपेशियों में खिंचाव, लिगामेंट की चोट, विटामिन की कमी या गलत पॉश्चर होता है।
इसी तरह हर चोट का मतलब फ्रैक्चर नहीं होता। कई बार चोट केवल लिगामेंट, टेंडन या मांसपेशियों तक सीमित होती है। इसलिए सही जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।
प्रश्न: भारत में ऑर्थोपेडिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के प्रयासों को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर: पिछले कुछ वर्षों में सरकार की पहल काफी बेहतर हुई है। आयुष्मान भारत और विभिन्न राज्य सरकारों की स्वास्थ्य योजनाओं ने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों तक भी बेहतर ऑर्थोपेडिक इलाज पहुंचाया है।
साथ ही लोगों में जागरूकता भी बढ़ी है और अब अधिक मरीज योग्य ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों से इलाज करवाना पसंद कर रहे हैं। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से आज कई जटिल सर्जरी भी आसानी से संभव हो गई हैं।
प्रश्न: अंत में युवा मेडिकल छात्रों के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर: चिकित्सा सेवा सबसे सम्मानजनक और संतोष देने वाले पेशों में से एक है, लेकिन इसमें सफलता पाने के लिए वर्षों की मेहनत, अनुशासन, निरंतर सीखने की इच्छा और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता आवश्यक है।
जो भी युवा इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, उन्हें केवल प्रतिष्ठा या आर्थिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करने के उद्देश्य से चिकित्सा को चुनना चाहिए। यदि समर्पण और ईमानदारी के साथ काम किया जाए तो यह पेशा समाज में वास्तविक बदलाव लाने का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है।

