Monday, August 10, 2026 |
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भारतीय शेयर बाजार के मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहे घरेलू निवेशक, FPI की बिकवाली का कम किया दबाव : SEBI

by Business Remedies
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नई दिल्ली | बिजनेस रेमेडीज
भारतीय शेयर बाजार के लिए घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) वित्त वर्ष 26 में एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरे हैं और इस दौरान उन्होंने 8.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। इससे पिछले वित्त वर्ष के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की 1.8 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली के शेयर बाजार पर प्रभाव को कम करने में मदद मिली है। यह जानकारी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की वार्षिक रिपोर्ट में दी गई। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी से डीआईआई की हिस्सेदारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर लिस्टेड सिक्योरिटीज में बढक़र 17 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं, एफपीआई की हिस्सेदारी घटकर 15 महीने के निचले स्तर 15.8 प्रतिशत पर आ गई है।
इसके अलावा, घरेलू निवेश में म्यूचुअल फंड का बड़ा हिस्सा रहा। इन्होंने लगभग 6.4 लाख करोड़ रुपए का योगदान दिया, जिसमें लगातार सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) निवेश और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी का अहम रोल रहा। यह ट्रेंड निवेशकों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच देखने को मिला है। साल के दौरान डीमैट खातों की संख्या बढक़र 22.5 करोड़ हो गई, जो डिजिटल ऑनबोर्डिंग और मार्केट तक आसान पहुंच की वजह से व्यापक भागीदारी को दर्शाता है।
सेबी की रिपोर्ट में भारत के कैपिटल मार्केट के बढ़ते विस्तार पर भी जोर दिया गया। कॉरपोरेट इंडिया ने पब्लिक इक्विटी ऑफरिंग के जरिए रिकॉर्ड 2.35 लाख करोड़ रुपए जुटाए। इसमें इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ), फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) और राइट्स इश्यू शामिल हैं। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 11.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 26 में रिकॉर्ड 257 कंपनियों ने एसएमई प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके 11,587 करोड़ रुपए जुटाए, जबकि राइट्स इश्यू के ज़रिए जुटाई गई पूंजी 134.2 प्रतिशत बढक़र 46,168 करोड़ रुपए हो गई। प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए जुटाया गया फंड 76.3 प्रतिशत बढक़र 1.48 लाख करोड़ रुपए हो गया, जबकि शेयर बायबैक 143.6 प्रतिशत बढक़र 19,238 करोड़ रुपए हो गया। कंपनियों ने अपने लगभग पूरे ऑफर साइज का इस्तेमाल किया। साथ ही, डेट मार्केट में भी जबरदस्त हलचल देखी गई, जिसमें पब्लिक डेट इश्यू के जरिए फंड जुटाने में 39.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 11,343 करोड़ रुपए हो गया। सेबी के अनुसार, ये घटनाक्रम भारत के कैपिटल मार्केट की बढ़ती परिपक्वता और मजबूती को दिखाते हैं, जहां घरेलू बचत ग्लोबल इन्वेस्टमेंट फ्लो के असर को कम कर रही है। बाजार नियामक ने यह भी कहा कि घरेलू भागीदारी बढऩे, रिटेल ओनरशिप में बढ़ोतरी और फंड जुटाने के अलग-अलग तरीकों ने एक बड़े और ज्यादा स्थिर मार्केट इकोसिस्टम में योगदान दिया है, भले ही विदेशी निवेशक साल भर शुद्ध विक्रेता बने रहे।



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