नई दिल्ली,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने महाराष्ट्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-160ए के घोटी-त्र्यंबक (मोखाडा)-जव्हार-मनोर-पालघर खंड के पुनर्वास और उन्नयन को स्वीकृति दे दी है। लगभग 154.635 किलोमीटर लंबी इस परियोजना पर कुल 3,320.38 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सरकार के अनुसार इस परियोजना से करीब 19.98 लाख मानव-दिवस का प्रत्यक्ष रोजगार और 24.86 लाख मानव-दिवस का अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा। साथ ही इस मार्ग के आसपास अतिरिक्त आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी। नासिक के पश्चिम में अंबड और सातपुर क्षेत्र महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम द्वारा विकसित औद्योगिक इकाइयों का बड़ा केंद्र है। यहां से भारी माल ढुलाई का यातायात निकलता है, जो वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग-848 के माध्यम से नासिक शहर से होकर गुजरता है और शहरी सड़कों पर दबाव बढ़ाता है। राजमार्ग-160ए के उन्नयन के बाद इन औद्योगिक क्षेत्रों से त्र्यंबक होते हुए शहर को बाईपास करने वाला वैकल्पिक मार्ग मिलेगा, जिससे जाम की समस्या कम होगी और परिवहन तेज होगा।
मुंबई और दक्षिण भारत के यातायात को राहत
मुंबई और दक्षिण दिशा से आने वाला यातायात इगतपुरी जंक्शन से समृद्धि एक्सप्रेसवे का उपयोग करेगा। इसके बाद वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग-848 से घोटी तक पहुंचकर राष्ट्रीय राजमार्ग-160ए के जरिए त्र्यंबक और नासिक की ओर जाएंगे। वर्ष 2028 के बाद इस मार्ग पर प्रतिदिन 10,000 से अधिक पीसीयू यातायात का अनुमान है, जिससे इसे चार लेन में विकसित किया जाएगा। त्र्यंबक से मनोर और पालघर की ओर जाने वाला हिस्सा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग-48 तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्र और पालघर जिले के जनजातीय इलाकों को जोड़ता है। वर्तमान में यहां लगभग 4,500 पीसीयू यातायात है, इसलिए दो लेन और पक्के कंधों के साथ मार्ग विकसित किया जाएगा, जबकि मनोर से पालघर के शहरी हिस्से में करीब 12,000 पीसीयू यातायात होने के कारण चार लेन का प्रस्ताव रखा गया है ताकि यातायात सुचारु रूप से चल सके। परियोजना को प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के सिद्धांतों के अनुरूप तैयार किया गया है। इससे महाराष्ट्र में 6 आर्थिक नोड, 1 सामाजिक नोड और 8 लॉजिस्टिक नोड आपस में जुड़ेंगे। सरकार का मानना है कि इससे देश के लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक में सुधार होगा और औद्योगिक व व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

