वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर बुधवार को भी दबाव बना रहा और प्रमुख मानक लगभग 4 महीने के निचले स्तर के आसपास कारोबार करते रहे। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने तथा अमेरिका-ईरान शांति वार्ताओं में प्रगति के कारण तेल आपूर्ति में संभावित बाधाओं को लेकर बाजार की चिंताएं घटी हैं।
अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह लगभग 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता रहा। वहीं, अमेरिका का वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जो करीब 1.5 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। पिछले 1 महीने के दौरान दोनों प्रमुख तेल मानकों में 20 प्रतिशत से अधिक की तेज गिरावट देखने को मिली है। इसका मुख्य कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति में लंबे समय तक व्यवधान की आशंकाओं का कम होना है। यह मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बाजार की धारणा में सुधार तब देखने को मिला जब संकेत मिले कि ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में फंसे तेल टैंकर अब दोबारा इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से आवागमन की तैयारी कर रहे हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। इसके अलावा, अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय पक्षों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों ने भी तेल आपूर्ति संबंधी चिंताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शांति वार्ताओं में प्रगति ने निवेशकों को यह संकेत दिया है कि निकट भविष्य में आपूर्ति संकट की संभावना पहले की तुलना में कम हो सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिए सकारात्मक मानी जा रही है। भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और सस्ती तेल कीमतें देश के आयात बिल को कम करने में मदद करती हैं। इससे मुद्रास्फीति पर दबाव घट सकता है तथा आर्थिक विकास को भी समर्थन मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में हाल के समय में देखी गई अत्यधिक अस्थिरता भारत के लिए अनुकूल साबित हो रही है। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में आई तेज गिरावट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद कई व्यापक आर्थिक चुनौतियों को कम किया है। भारतीय मुद्रा की स्थिति अपेक्षाकृत स्थिर हुई है और विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली में भी कमी के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जो वित्तीय बाजारों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड का लगभग 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के आसपास बने रहना इस बात का संकेत है कि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है और अमेरिका-ईरान शांति वार्ता आगे बढ़ रही है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं। हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। यदि इस मार्ग से होने वाले समुद्री परिवहन में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होता है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजारों में फिर से अस्थिरता बढ़ सकती है और तेल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिल सकता है।

