Sunday, June 28, 2026 |
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तमिलनाडु में बढ़ी महीन धान की कीमतें, आपूर्ति घटने से बाजार में चिंता गहराई

by Business Remedies
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Fine Paddy Varieties Prices Rise In Tamil Nadu Due To Supply Shortage And Strong Demand

तमिलनाडु में सांबा और देर से की जाने वाली धान की खेती का मौसम समाप्ति की ओर बढ़ने के साथ प्रमुख महीन धान किस्मों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस स्थिति ने व्यापारियों, चावल मिल संचालकों और उपभोक्ताओं के बीच गुणवत्तापूर्ण धान की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सबसे अधिक मांग वाली किस्मों में शामिल अक्षया पोन्नी ने रिकॉर्ड स्तर छू लिया है। थोक बाजारों में यह किस्म ₹.37 से ₹.42 प्रति किलोग्राम के बीच बिक रही है। वहीं अन्य लोकप्रिय महीन किस्में, जिनमें आरएनआर और श्री शामिल हैं, ₹.37 से ₹.38 प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से बाजार में धान की आवक घटने के कारण आया है। विपणन सत्र अपने अंतिम चरण में पहुंचने के कारण नए भंडार सीमित होते जा रहे हैं, जिससे धान का व्यापार अब चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है।

उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कच्चे धान की कमी का असर खुदरा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। महीन और अति-महीन चावल की किस्में कई बाजारों में ₹.60 से ₹.70 प्रति किलोग्राम से अधिक कीमत पर बिक रही हैं। अक्षया पोन्नी और श्री किस्मों की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है क्योंकि उपभोक्ताओं के बीच इनकी मांग लगातार मजबूत बनी हुई है जबकि उपलब्धता सीमित है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि धान की कीमतें सामान्य स्तर की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी हैं। इसके अलावा भूसी और चोकर जैसे सह-उत्पादों की कीमतों में भी मध्यम बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिससे समग्र बाजार गतिविधियों में तेजी आई है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि तमिलनाडु अभी भी महीन धान की आपूर्ति के लिए पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से कर्नाटक, पर काफी हद तक निर्भर है। राज्य की कुल आवश्यकता का बड़ा हिस्सा बाहरी क्षेत्रों से आता है, जिसके कारण अन्य राज्यों में उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी परिस्थितियों का सीधा प्रभाव तमिलनाडु के बाजारों पर पड़ता है।

इस वर्ष कर्नाटक में कम वर्षा और तुंगभद्रा बांध क्षेत्र में चल रहे कार्यों से उत्पन्न व्यवधानों के कारण धान उत्पादन प्रभावित हुआ है। उत्पादन में आई गिरावट के चलते तमिलनाडु पहुंचने वाली आपूर्ति कम हो गई, जिससे मांग का दबाव बढ़ा और कीमतों में और तेजी आ गई।

विशेष रूप से अक्षया पोन्नी किस्म ने हाल के वर्षों की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की है। इसकी कीमत लगभग ₹.36 प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब ₹.42 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। हालांकि बाजार से जुड़े पक्षों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा होती है और अगले खेती सत्र में बुवाई का दायरा बढ़ता है, तो स्थिति में सुधार संभव है। कृषि व्यापार संगठनों ने किसानों को अधिक मांग वाली महीन धान किस्मों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि स्थानीय उत्पादन बढ़ाने से पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता कम होगी, आपूर्ति व्यवस्था अधिक स्थिर बनेगी और भविष्य में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।



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