नई दिल्ली,
रूस ने Wings India 2026 में अपने नागरिक विमानों इल्यूशिन आईएल 114-300 और सुपरजेट एसजे 100 को प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है। यह कदम भारत–रूस आर्थिक सहयोग के नए चरण की ओर संकेत करता है, जिसमें विशेष ध्यान नागरिक विमानन क्षेत्र पर केंद्रित है। एक रिपोर्ट के अनुसार, मॉस्को केवल विमान बिक्री तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भारत के तेजी से बढ़ते क्षेत्रीय विमानन बाजार में दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी स्थापित करना चाहता है। अब तक भारत में विमानन क्षेत्र की वृद्धि मुख्य रूप से एयरबस और बोइंग को भारतीय एयरलाइनों द्वारा दिए गए बड़े ऑर्डर के कारण हुई है। हालांकि इन बड़े सौदों के पीछे एक तेजी से उभरता हुआ क्षेत्रीय विमानन खंड भी है, जो दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों को जोड़ता है। हवाई अड्डों के विस्तार और सरकार की उड़ान योजना के समर्थन से यह खंड हर वर्ष लगभग 18 से 36 मिलियन यात्रियों को सेवा देता है। यह क्षेत्र विमान खरीद, लीजिंग, मेंटेनेंस, प्रशिक्षण और संचालन सहित बहु-अरब डॉलर के अवसर प्रस्तुत करता है।
रूस अब इसी बाजार को लक्ष्य बना रहा है। रक्षा और औद्योगिक सहयोग के लंबे संबंधों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार “Make In India” कार्यक्रम के अंतर्गत रूसी निर्माताओं को स्थानीय उत्पादन और असेंबली इकाइयां स्थापित करने की अनुमति दे सकती है। इससे केवल आयात के बजाय घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इल्यूशिन आईएल 114-300 एक 68 सीटों वाला टर्बोप्रॉप विमान है, जिसे छोटी रनवे और कठिन परिचालन परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है। इसे एटीआर 72-600 और डैश-8 क्यू 400 जैसे विमानों का प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है, जो वर्तमान में भारत के क्षेत्रीय मार्गों पर प्रमुख हैं। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, बड़े पैमाने पर उत्पादन स्थिर होने के बाद इसकी कीमत लगभग 20 मिलियन से 35 मिलियन डॉलर के बीच हो सकती है।
सुपरजेट एसजे 100 में लगभग 87 से 98 यात्रियों के बैठने की क्षमता है और यह क्षेत्रीय जेट बाजार के उच्च खंड को लक्ष्य बनाता है। यह एम्ब्रेयर ई-जेट परिवार के छोटे विमानों से प्रतिस्पर्धा करेगा और इसकी अनुमानित कीमत 30 मिलियन से 36 मिलियन डॉलर के बीच हो सकती है। हालांकि दोनों रूसी विमानों की कीमतें पश्चिमी विकल्पों से बहुत कम नहीं हैं, लेकिन इनका मुख्य आकर्षण औद्योगिक अवसर हैं। रूसी निर्माता विमानों के साथ भारत में स्थानीय निर्माण, असेंबली और पुर्जों की आपूर्ति के प्रस्ताव भी दे रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे निर्णय केवल आयात का नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक औद्योगिक रणनीति का हिस्सा बन जाएगा।
विमान निर्माण और दीर्घकालिक तकनीकी सहयोग से उच्च कौशल वाले रोजगार सृजित होंगे, जिनमें इंजीनियरिंग, सटीक निर्माण, एवियोनिक्स और मेंटेनेंस शामिल हैं। साथ ही आपूर्तिकर्ता तंत्र विकसित होगा, जो दशकों तक उद्योग को स्थिरता देगा। यदि रूसी नागरिक विमान भारतीय बाजार में प्रवेश करते हैं तो मेंटेनेंस, मरम्मत और ओवरहाल एक प्रमुख क्षेत्र बन सकता है। किसी भी विमान का अधिकांश आर्थिक मूल्य उसकी डिलीवरी के बाद 25 से 30 वर्षों की परिचालन अवधि में स्पेयर पार्ट्स, अपग्रेड, प्रशिक्षण और इंजन ओवरहाल के माध्यम से उत्पन्न होता है।

