नई दिल्ली,
देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नया आदेश जारी किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब खाड़ी क्षेत्र में हालात बिगड़ने और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधा के कारण ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। सरकार द्वारा जारी यह नया आदेश 24 मार्च को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इस आदेश के तहत पाइपलाइन बिछाने, निर्माण, संचालन और विस्तार से जुड़े सभी कार्यों के लिए एक समान ढांचा तैयार किया गया है, जिससे लंबे समय से आ रही प्रशासनिक और स्थानीय अड़चनों को दूर किया जा सके।
ईंधन आपूर्ति संकट के बीच अहम कदम
खाड़ी क्षेत्र में गैस प्रसंस्करण संयंत्रों को भारी नुकसान और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में लगातार अवरोध के चलते वैश्विक स्तर पर ईंधन आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इसी को देखते हुए सरकार ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने और घरेलू ढांचे को मजबूत करने की दिशा में तेजी दिखाई है। सरकार के अनुसार, अब तक पाइपलाइन परियोजनाओं में कई प्रकार की बाधाएं सामने आती रही हैं। इनमें विभिन्न विभागों से अनुमति मिलने में देरी, भूमि उपयोग को लेकर विवाद, अत्यधिक शुल्क और आवासीय क्षेत्रों में स्थानीय लोगों का विरोध शामिल है। कई स्थानों पर जहां पहले से प्राकृतिक गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां भी लोग रसोई गैस सिलेंडर का उपयोग जारी रखते हैं, जिससे संसाधनों का संतुलन बिगड़ता है। नए आदेश के तहत इन समस्याओं को दूर करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिससे पाइपलाइन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।
घरेलू उपभोक्ताओं को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि यदि अधिक से अधिक घरों तक पाइपलाइन के जरिए प्राकृतिक गैस पहुंचाई जाती है, तो रसोई गैस सिलेंडर की मांग कम होगी। इससे उन क्षेत्रों में अतिरिक्त सिलेंडर उपलब्ध कराए जा सकेंगे जहां अभी तक पाइपलाइन सुविधा नहीं है। इस कदम से ईंधन वितरण प्रणाली अधिक संतुलित और प्रभावी बनेगी। प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए विभिन्न क्षमता की पाइपलाइन बिछानी होती है, जो मुख्य ट्रांसमिशन लाइनों या भंडारण केंद्रों से जुड़ी होती हैं। नए आदेश में इन सभी प्रक्रियाओं को सरल और तेज बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही अधिकृत संस्थाओं को आवश्यक अधिकार दिए गए हैं ताकि वे बिना अनावश्यक देरी के कार्य पूरा कर सकें।
ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयातित तरलीकृत प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जारी संकट ने देश की आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। ऐसे में सरकार अब घरेलू स्तर पर मजबूत ढांचा विकसित करने और बाहरी झटकों के प्रभाव को कम करने की दिशा में काम कर रही है। यह नया आदेश इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य देशभर में प्राकृतिक गैस की पहुंच बढ़ाना और ऊर्जा क्षेत्र को अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाना है।

