बिजनेस रेमेडीज/ मुंबई/ आईएएनएस। अमेरिकी-ईरान युद्ध में तनाव बढऩे और शांति समझौते की अनिश्चितता के कारण हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ी गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क निफ्टी50 और सेंसेक्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,690.23 अंक यानी 2.25 प्रतिशत गिरकर 73,583.22 पर था, तो वहीं एनएसई निफ्टी50 486.85 अंकों यानी 2.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,819.60 पर था। शुक्रवार को ऑटो और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली रही। दिन के कारोबार में सेंसेक्स 74,883.79 पर खुलकर एक समय 1,736 अंक या 2.30 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 73,534.41 के दिन के निचले स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी50 23,173.55 पर खुलकर एक समय 501 अंक या 2.15 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 22,804.55 पर पहुंच गया।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सबसे ज्यादा
नुकसान झेलने वाले रहे सेक्टर
सेक्टरवार देखें तो, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसयू) सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 3.86 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (3.17 प्रतिशत की गिरावट), निफ्टी ऑटो (2.82 प्रतिशत की गिरावट), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (2.69 प्रतिशत की गिरावट) और निफ्टी प्राइवेट बैंक (2.01 प्रतिशत की गिरावट) का प्रदर्शन भी खराब रहा। इस बीच, निफ्टी आईटी सबसे कम नुकसान (0.44 प्रतिशत की गिरावट) के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सेक्टर के रूप में उभरा। निफ्टी50 में सिर्फ 6 कंपनी के शेयरों में तेजी देखने को मिली, जिसमें ओएनजीसी में 4.03 प्रतिशत की तेजी, विप्रो में 1.22 प्रतिशत की उछाल, भारती एयरटेल में 0.82 प्रतिशत की तेजी, टीसीएस में 0.42 प्रतिशत की तेजी, कोल इंडिया में 0.32 प्रतिशत की तेजी और पावरग्रिड में 0.24 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके विपरीत, श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में सबसे ज्यादा 5.54 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। इसके बाद टीएमपीवी में 4.92 प्रतिशत, रिलायंस में 4.61 प्रतिशत, इंडिगो में 4.48 प्रतिशत और बजाज फाइनेंस में 4.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और ये टॉप लूजर्स में शामिल रहे।
निवेशकों को 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान
दिन के कारोबार में निवेशकों को लगभग 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सत्र के 431 लाख करोड़ रुपए से घटकर 422 लाख करोड़ रुपए हो गया।
शेयर बाजार में गिरावट का कारण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ संघर्ष थमने के संकेत दिए थे, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। जब तक ये संघर्ष चलता है तब तक कच्चे तेल के दाम कम होने की उम्मीद नहीं है। इससे महंगाई बढऩे का खतरा है जिस वजह से बाजार में गिरावट है। इसके अलावा गुरुवार को रामनवमी की वजह से भारतीय बाजार बंद थे, जबकि एशियाई बाजारों में गिरावट आई और अमेरिकी बाजारों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया।
रुपए में 14 सालों की सबसे बड़ी गिरावट
शुक्रवार को ही भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.7 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और एनर्जी सप्लाई चैन में आई रुकावटों के कारण भारतीय रुपए में यह गिरावट दर्ज की गई। पिछले एक महीने में ही रुपया करीब 4 फीसदी टूट चुका है, जबकि इस फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में इसमें 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। यह पिछले 14 सालों की सबसे बड़ी गिरावट है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ईरान जंग जारी रही तो रुपया जल्द ही 98 के स्तर तक जा सकता है। वर्ष, 2011-12 के बाद रुपए में सबसे बड़ी गिरावट देखी जा रही है।

