मादा एनोफिलीज मच्छरों के काटने से फैलने वाली घातक बीमारी मलेरिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने, इसके नियंत्रण और उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने के लिए आज विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य बीमारी के प्रति जागरूकता और सामुदायिक सहयोग बढ़ाना है। वैसे तो विज्ञान नीत नई गति से प्रगति कर रहा है। पर अब भी मलेरिया उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयास की जरूरत है। पर मलेरिया को सिर्फ दवा से नहीं, बल्कि स्वच्छता, विज्ञान और सामूहिक संकल्प से ही हराया जा सकता है। डब्लूएचओ का लक्ष्य 2030 तक मलेरिया के मामलों और मृत्यु को 90 फीसदी तक कम करना है। सामुदायिक भागीदारी से भी इसे दूर किया जा सकता है, जिसमें मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाले उत्पादों और पर्यावरण स्वच्छता को बढ़ावा देना है। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को कम करने में लोगों को शामिल करना होगा। मलेरिया उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लाखों लोगों के लिए खतरा है। वर्ष, 2021 में ही 247 मिलियन लोग मलेरिया की चपेट में आए और 6 लाख से ज्यादा मौतें हुईं। इसकी शुरुआत अफ्रीका मलेरिया दिवस से हुई, जिसे वर्ष, 2001 में अबूजा घोषणा के बाद से मनाया जा रहा था। अफ्रीकी नेताओं ने मलेरिया से होने वाली मौतों को कम करने का संकल्प लिया था। जहां डब्लूएचओ के सदस्य देशों ने 2007 में विश्व स्वास्थ्य सभा के 60वें सत्र में 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस के रूप में स्थापित किया। विश्व मलेरिया दिवस पहली बार 25 अप्रैल, 2008 को मनाया गया। मलेरिया एक प्रमुख वैश्विक स्वास्थ्य समस्या बनी रही, इसलिए वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस अभियान को अफ्रीका से बढ़ाकर पूरी दुनिया में लागू किया गया। जहां तक है भारत ने वर्ष, 2027 तक मलेरिया मुक्त होने और 2030 तक इसे पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। भारत में मलेरिया के मामलों में लगभग 80 फीसदी की गिरावट भी आई है। सरकार की ओर से राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, मलेरिया उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय रूपरेखा 2016-2030 और हाई बर्डन टू हाई इम्पैक्ट पहल जैसे कार्यक्रम भी चल रहे हैं।

