खरीफ फसल बुआई को लेकर किसान इनदिनों उत्साहित तो है, पर उन्हें चिंता भी सता रही है कि कहीं अल नीनो होने से फसल खराब ना हो जाए। कुछ राज्यों में बारिश शुरू होने के कारण किसानों ने बुआई भी शुरू कर दी है, जबकि कुछ राज्यों में किसान मानसूनी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। वहीं पिछले दिनों मौसम विभाग की ओर से अल नीनो की संभावना जताए जाने के कारण उन्हें पैदावार कम होने का डर है। अल नीनो के कारण मानसून कमजोर, अनियमित या बीच-बीच में लंबे सूखे अंतराल वाला हो सकता है। ऐसे में खरीफ फसलों की बुआई और प्रबंधन के लिए किसानों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। ऐसे में कृषि मंत्रालय भी किसानों को जल संरक्षण, कम अवधि वाली किस्में तथा वैकल्पिक फसल योजना अपनाने की सलाह दे रहे हैं। खरीफ बुआई के समय किसान पहली बारिश में जल्दबाजी ना करें, केवल 1-2 बारिश होने पर बुआई ना करें, जब खेत में पर्याप्त नमी बन जाए और लगातार अच्छी वर्षा की संभावना हो, तभी बुआई करें। समय से पहले बुआई करने पर अंकुरण खराब हो सकता है। कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली किस्में चुनें, बाजरा, मूंग, उड़द, तिल, अरहर जैसी फसलें सूखा सहनशील होती हैं। कृषि मंत्रालय भी अल नीनो की स्थिति में कम अवधि वाली दलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा देने की सलाह दे रहा है। इसके अलावा किसान प्रमाणित बीज का उपयोग करें तथा बीजोपचार अवश्य करें। 10-15 फीसदी अतिरिक्त बीज रखें ताकि दोबारा बुआई की जरूरत पड़े तो समस्या ना हो। किसानों को अधिक पैदावार के लिए नमी संरक्षण पर विशेष ध्यान दें, खेत की गहरी जुताई करें, मेड़बंदी करें और संतुलित उर्वरक प्रबंधन के उपाय जरूर करने चाहिए।

