Wednesday, July 1, 2026 |
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जीवन निर्माण में ‘स्पष्टता’ का होना बहुत आवश्यक: जैनाचार्य विजयराज म.सा.

तिलक नगर स्थित नवकार भवन में प्रवचन

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। तिलक नगर स्थित नवकार भवन में मंगलवार को जैनाचार्य विजयराज म.सा. ने प्रवचन में जीवन निर्माण के पांचवें घटक ‘स्पष्टता’ पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जीवन निर्माण में स्पष्टता का होना बहुत आवश्यक है, इसलिए हमें जीवन के प्रति स्पष्टता रखनी चाहिए। एक ओर जहां जीवन में अस्पष्टता भय, भ्रम और भ्रांतियों को जन्म देती है। आज हम सब भयभीत मनोदशा में जी रहे है। अगर हम हमारी सोच को स्पष्ट रखेंगे तो हमारे जीवन में किसी भी प्रकार का भय, भ्रम और भ्रांतियां नहीं रहेगी। जहां स्पष्टता जीवन का समाधान है, वहीं अस्पष्टता एक दोष है। आचार्य श्री ने कहा कि स्पष्टता का मतलब साफ-सुथरा होना है। हमें अपने जीवन में स्पष्टता रखते हुए साफ सुथरा रहना है, अस्पष्टता रखकर जीवन को गड़बड़झाला नहीं बनाना है। उन्होंने प्रवचन की शुरुआत महाप्रभु महावीर स्वामी तथा गुरुदेव नानालाल जी म.सा. को वंदन करके की। उसके बाद आचार्य श्री ने ‘साधना में रंग आना चाहिए..भावना में ढंग आना चाहिए.. सब बने अनुकूल चिंतन है सही, विश्व में हर मनुष्य चाहता है यही…’ गीत गाकर श्रावक-श्राविकाओं के समक्ष दोहराए।
जीवन के है चार स्तर: जैनाचार्य विजयराज म.सा. ने आगे प्रवचन की कड़ी में कहा कि जीवन के चार स्तर है, प्रथम व्यवसायिक जीवन-यह जीवन धन पर आधारित होता है। दूसरा सामाजिक जीवन- यह जीवन तन पर आधारित होता है। तीसरा पारिवारिक जीवन- यह जन पर आधारित जीवन होता है और जन-जन के सहयोग से चलता है। चौथा व्यक्तित्व जीवन- हमारा निजी जीवन मन पर आधारित जीवन होता है। अगर हम अपने मन पर अधिकार रखते हैं तो हमारा निजी जीवन सफल,सार्थक, सहज,समरस और सरल हो जाता है। इसलिए हमें निजी जीवन में स्पष्ट रहना चाहिए। स्पष्टता से हमारी साधना में रंग और भावना में ढंग आ जाता है। हम जैसे अंदर से है, वैसे ही बाहर से भी होने चाहिए। हमारे जीवन का चेहरा एकरूप और दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए।
इंसानियत ही वास्तविक धर्म: आचार्य श्री ने शिक्षा के संबंध में भी अपने विचार व्यक्त किए। इसके अलावा उन्होंने प्रवचन में इंसानियत के बारे विस्तृत चर्चा की। उनका कहना है कि इंसानियत का धर्म ही वास्तविक धर्म है, वरना सारे धर्म कर्म है। इसी संदर्भ में उन्होंने एक भजन सुनाया.. किसी के काम जो आए..उसे इंसान कहते हैं, उसे इंसान कहते हैं। पराया दर्द जो अपनाएं.. उसे इंसान कहते हैं, उसे इंसान कहते हैं। आचार्य श्री के प्रवचन से पूर्व संत दिव्यम मुनि म.सा. ने आनंदम.. आनंदम.. गुरु चरणों में आनंदम.. गीत प्रस्तुत किया। श्री साधुमार्गी शांतक्रांति जैन संघ की ओर से जानकारी दी गई कि प्रत्याखान की श्रंखला में अन्य प्रत्याखानों के साथ मंगलवार को श्राविका नीतू ढाबरिया धर्मसहायिका हनुवंत ढाबरिया ने 19 उपवास के प्रत्याखान लिए।



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