बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। लेंसकार्ट सॉल्यूशंस लिमिटेड का आईपीओ खुल चुका है जो कि 4 नवम्बर 2025 को बंद होगा। निवेशकों में कंपनी के बिजनेस मॉडल को जानने की उत्सुकता है। ग्रे मार्केट में 10 से 17 परसेंट का प्रीमियम आ रहा है। लेकिन यह दिखावा भी हो सकता है। शार्क टैंक में स्टार्टअप कंपनियों को वैल्यूएशन पर ज्ञान देने वाले पियूष बंसल ने लेंसकार्ट के हाई वैल्यूएशन पर चुप्पी साध ली है। खबर लिखे जाने तक रिटेल निवेशकों की ओर से 1,27,49,423 शेयरों के लिए बोली आ चुकी थी। यानी कि निवेशक आईपीओ में जोखिम लेने के लिए तैयार हैं।
कंपनी की कुल बिक्री में विदेश से प्राप्त राजस्व का हिस्सा करीब 40 फ़ीसदी है। कंपनी के हाई वैल्यूएशन को इस तथ्य से जस्टिफाई किया जा रहा है। वहीं फिजिटल जो की फिजिकल और डिजिटल का सम्मिलित रूप है, के मॉडल को कंपनी की ताकत बताया जा रहा है। लेकिन इसमें एसेट हैवी होने का जोखिम भी है।
उल्लेखनीय है कि कंपनी आईवेयर की इंडस्ट्री परंपरागत रूप से असंगठित क्षेत्र द्वारा संचालित की जाती थी और अभी भी बड़े स्तर पर की जा रही है। कीमतें असंगत होने के कारण इस सेगमेंट में काफी अच्छा मार्जिन था। ऑनलाइन कंपनियां इस सेगमेंट में थी नहीं। लेंसकार्ट ने अपॉर्चुनिटी देख गैप को फिल किया। लेकिन यह डिस्ट्रीब्यूशन का बिजनेस है और कई स्टार्टअप कंपनियां इस सेगमेंट को क्रैक करने के लिए अग्रसर हैं एवं आगे भी करेंगी। विशेषज्ञ का मानना है कि प्रतिस्पर्धा के कारण इस बिजनेस में आगे जाकर ठहराव दिख सकता है। आज भी टॉप क्लास आईवेयर ग्लास भारत में यूरोपीय देशों से आयात किए जाते हैं। अगर लेंसकार्ट यह करने में सक्षम होता तो लंबे समय तक स्थायित्व प्रदान करने वाला बिजनेस बनता। लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन का बिजनेस आसानी से कॉपी किया जा सकता है और क्रैक करने की संभावना काफी अधिक है। जानकार मानते हैं कि खुद का पैसा खर्च करके कंपनी के प्रवर्तक पियूष बंसल ने शार्क टैंक में शार्क की भूमिका निभाई ताकि लेंसकार्ट की मार्केटिंग की जा सके एवं ऊंचे भावों पर आईपीओ लाया जा सके और संस्थागत निवेशकों को एग्जिट दी जा सके।
भोले भाले निवेशकों को समझना चाहिए कि न्यू एज बिजनेस में निवेश की अपॉर्चुनिटी तो है लेकिन भारी भरकम वैल्यूएशन पर जोखिम भी काफी ज्यादा है। आईपीओ लाने के साल और पिछले साल में ही कंपनी प्रॉफिट में आई है जो कि दर्शा रहा है कि कंपनी ने बड़ी चालाकी से विंडो ड्रेसिंग की है। पोस्ट आईपीओ ईपीएस 1.41 रुपए के आधार पर कंपनी का आईपीओ 284.96 के पीई मल्टीपल पर आया है। वहीं कंपनी के आईपीओ का प्राइस टू बुक वैल्यू 11.03 है। इस आधार पर कह सकते हैं कि कंपनी का वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है। वहीं आईपीओ के बाद कंपनी की मार्केट कैप 70000 करोड़ रुपए से ज्यादा की होगी जो वित्त वर्ष 25 के सालाना राजस्व करीब 7000 करोड़ रुपए की 10 गुना है। जानकारों का मानना है हैं कि सालाना बिक्री का 3 गुना से 5 गुना ज्यादा से ज्यादा का वैल्यूएशन दिया जा सकता है। यानी की 200 या 200 से रुपए कम पर लेंसकार्ट का आईपीओ आना चाहिए था।
ऐसा लग रहा है कि कंपनी का आईपीओ ऊंचे वैल्यूएशन पर सिर्फ संस्थागत निवेशकों को एग्जिट देने के लिए आया है। वहीं कंपनी में प्रवर्तकों की आईपीओ के बाद हिस्सेदारी केवल 17.52 फीसदी बचेगी। इससे भविष्य में कंपनी के जबरन अधिग्रहण की आशंका बनी रहेगी। आईपी के जरिए कंपनी द्वारा 7278.02 करोड़ रुपए जुटाए जा रहे हैं। इनमें से 5128.02 करोड़ रुपए ऑफर फॉर सेल के जरिए जुटाए जा रहे हैं। ओएफएस का पैसा कंपनी के काम नहीं आएगा बल्कि संस्थागत निवेशकों को मिलेगा।
नोट: यह लेख निवेश सलाह नहीं है।

