भारत के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग रियल एस्टेट क्षेत्र ने वर्ष 2026 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 के दौरान इस क्षेत्र में कुल 18.3 मिलियन वर्गफुट लीजिंग दर्ज की गई। इस दौरान कुल गतिविधियों में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत रही, जो देश में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों को दर्शाती है। रिपोर्ट के अनुसार पहली तिमाही के अंत तक देश के आठ प्रमुख शहरों में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र का कुल संचयी भंडार बढ़कर 514मिलियन वर्गफुट तक पहुंच गया। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारत वैश्विक विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक भारत का औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार लगभग 850 मिलियन वर्गफुट तक पहुंच सकता है। मौजूदा स्तरों की तुलना में यह 11.4 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक कंपनियों की भारत में बढ़ती रुचि और आपूर्ति श्रृंखला के विस्तार से इस क्षेत्र को लगातार मजबूती मिल रही है। जेएलएल इंडिया के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स विभाग के प्रबंध निदेशक योगेश शेवाडे के अनुसार, भारत का औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार लगातार विकसित हो रहा है। उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेड ए स्पेस का विस्तार तेज गति से हो रहा है। इसका भंडार सालाना आधार पर 20 प्रतिशत बढ़कर 293मिलियन वर्गफुट तक पहुंच गया है, जो अब कुल बाजार भंडार का 57प्रतिशत हिस्सा बन चुका है।
विनिर्माण क्षेत्र ने पहली तिमाही में 5.1 मिलियन वर्गफुट की लीजिंग दर्ज की। यह वर्ष 2025 के मजबूत प्रदर्शन के बाद आया है, जब विनिर्माण क्षेत्र ने 19.3 मिलियन वर्गफुट क्षेत्र लीज पर लिया था। उस वर्ष कुल 73.7 मिलियन वर्गफुट सकल लीजिंग में विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी 26 प्रतिशत रही थी। विनिर्माण क्षेत्र के भीतर इंजीनियरिंग उद्योग का दबदबा देखने को मिला, जिसने कुल विनिर्माण सौदों में 47 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की। वहीं वाहन और सहायक उद्योग खंड की हिस्सेदारी 32प्रतिशत रही, जिससे इस क्षेत्र में उत्पादन गतिविधियों की मजबूती का संकेत मिलता है।
वेयरहाउसिंग गतिविधियों ने पहली तिमाही की कुल लीजिंग का 72 प्रतिशत हिस्सा अपने नाम किया। इस दौरान 13.2 मिलियन वर्गफुट क्षेत्र की मांग दर्ज की गई। मांग का सबसे बड़ा हिस्सा तृतीय-पक्ष लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से आया। इसके अलावा उपभोग आधारित क्षेत्रों जैसे ई-कॉमर्स, तीव्र उपभोक्ता वस्तुएं, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुएं और खुदरा क्षेत्र ने भी मजबूत मांग पैदा की।
शहरों के प्रदर्शन की बात करें तो मुंबई और पुणे ने संयुक्त रूप से कुल लीजिंग का 43प्रतिशत हिस्सा हासिल किया, जिससे ये दोनों शहर देश के औद्योगिक और वेयरहाउसिंग बाजार के प्रमुख केंद्र बने रहे। दिल्ली-एनसीआर ने 20 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ उत्तरी भारत के महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में अपनी स्थिति बरकरार रखी। वहीं बेंगलुरु और चेन्नई की हिस्सेदारी क्रमशः 13 प्रतिशत और 12 प्रतिशत रही। भारत में बढ़ते विनिर्माण निवेश, मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी के चलते आने वाले वर्षों में औद्योगिक और वेयरहाउसिंग क्षेत्र के और अधिक विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

