New Delhi,
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने गुरुवार को जारी एक बयान में बताया कि देश में रेलवे पटरियों के आधुनिकीकरण से रेल नेटवर्क अब पहले से अधिक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बन रहा है। पटरियों के नवीनीकरण, उन्नत जांच तकनीक और मशीनों के जरिए रखरखाव से यात्रा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और ट्रेनों की गति भी बढ़ी है। बयान के अनुसार, इन सुधारों से ट्रेनों में देरी कम हुई है और यात्रियों को अधिक सुगम यात्रा का अनुभव मिल रहा है। साथ ही, बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की मांग को पूरा करने में भी भारतीय रेलवे को मदद मिल रही है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के एक लेख का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2014 से अब तक करीब 55,000 किलोमीटर पटरियों का नवीनीकरण किया गया है। इससे सुरक्षा में सुधार हुआ है, यात्रा अधिक आरामदायक बनी है और बार-बार मरम्मत की जरूरत कम हुई है। रेल मंत्री के अनुसार, लगभग 44,000 किलोमीटर लंबी रेल पैनल बिछाई गई हैं। लंबी पटरियों के कारण जोड़ कम होते हैं, जिससे ट्रेन संचालन अधिक सुचारु और सुरक्षित होता है। इसके अलावा, 80,000 किलोमीटर से अधिक मजबूत 60 किलोग्राम रेल पटरियों का उपयोग किया जा रहा है, जो भारी भार और अधिक गति को सहन करने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में लगभग 80 प्रतिशत रेल नेटवर्क पर ट्रेनें 110 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक गति से चल रही हैं। साथ ही, रेल और वेल्डिंग से जुड़ी खराबियों में 90 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिला है।
रेलवे में मशीनों के उपयोग में भी बड़ा विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में जहां 748 ट्रैक मशीनें थीं, वहीं 2026 में उनकी संख्या बढ़कर 1,785 हो गई है। ये मशीनें पटरी को समतल करने, पत्थरों की सफाई और रेल घिसाई जैसे कार्य अधिक तेज और सटीक तरीके से करती हैं, जिससे रखरखाव की गुणवत्ता बेहतर हुई है। रेल मंत्री ने कहा कि पटरी पूरे रेलवे तंत्र की नींव होती है। जब यह मजबूत और अच्छी स्थिति में होती है, तो ट्रेनें सुरक्षित और तेज गति से चलती हैं। लेकिन यदि पटरी में दरार, ढीलापन या गंदगी हो, तो इससे गति पर असर पड़ता है, देरी होती है और सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है। उन्होंने आगे बताया कि देश में रोजाना 25,000 से अधिक ट्रेनें संचालित होती हैं, जो प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा देती हैं। इसके साथ ही कोयला, लोह अयस्क, अनाज, इस्पात और सीमेंट जैसी बड़ी मात्रा में वस्तुओं की ढुलाई भी की जाती है। यह सब 1,37,000 किलोमीटर से अधिक लंबे रेलवे नेटवर्क पर संभव हो रहा है।



