Friday, September 11, 2026 |
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बढ़ती महंगाई का असर कर्मचारियों पर गहराया, 73 प्रतिशत भारतीय नियोक्ताओं ने जताई चिंता

by Business Remedies
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Indian Employers Reporting Impact Of Rising Living Costs On Employees In India Category: Jobs & Careers

भारत में बढ़ती महंगाई का असर अब कार्यस्थलों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 73 प्रतिशत भारतीय नियोक्ताओं का मानना है कि जीवन-यापन की बढ़ती लागत उनकी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को प्रभावित कर रही है। इससे कर्मचारियों की अपेक्षाओं, कार्यशैली और वित्तीय व्यवहार में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

रिपोर्ट में सामने आया कि 56 प्रतिशत नियोक्ताओं ने कर्मचारियों की वेतन संबंधी अपेक्षाओं में वृद्धि दर्ज की है। वहीं, 36 प्रतिशत नियोक्ताओं ने बताया कि कर्मचारियों की ओर से लचीली कार्य व्यवस्था की मांग भी बढ़ी है। कर्मचारियों का मानना है कि बढ़ते खर्चों के बीच कार्य और व्यक्तिगत जीवन के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। हालांकि अधिकांश संस्थाएं इस बढ़ते दबाव को पहचान रही हैं, लेकिन बड़ी संख्या में कंपनियों ने अभी तक अपनी नीतियों या सुविधाओं में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कर्मचारियों की आर्थिक चुनौतियों को समझने के बावजूद संगठनों की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत सीमित बनी हुई है।

सर्वेक्षण में शामिल लगभग 68 प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि उनकी वर्तमान आय उनके जीवन-स्तर को आरामदायक ढंग से बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं है। इनमें से 32 प्रतिशत कर्मचारियों ने बताया कि उनका वेतन केवल आवश्यक खर्चों को पूरा करने भर के लिए पर्याप्त है। वहीं, 24 प्रतिशत कर्मचारियों ने अपनी आर्थिक स्थिति को संभालना कठिन बताया, जबकि 12प्रतिशत कर्मचारी गंभीर वित्तीय तनाव का सामना कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक दबाव समय के साथ और अधिक बढ़ता दिखाई दे रहा है। करीब 41प्रतिशत कर्मचारियों ने कहा कि वे आज से दो वर्ष पहले की तुलना में अधिक वित्तीय तनाव महसूस कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण दैनिक खर्चों में लगातार बढ़ोतरी और आय में अपेक्षित वृद्धि का अभाव बताया गया है। Indeed India के प्रबंध निदेशक साशी कुमार के अनुसार, यह स्थिति नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं को समझने का अवसर है। उन्होंने कहा कि केवल वेतन वृद्धि ही अब कर्मचारियों की प्राथमिकता नहीं रह गई है, बल्कि वे कार्य की गुणवत्ता, स्थिरता और दीर्घकालिक संतुष्टि को भी महत्व दे रहे हैं।

आर्थिक दबाव बढ़ने के साथ ही कर्मचारी अपनी आय को सुरक्षित बनाने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि 36 प्रतिशत कर्मचारी बेहतर वेतन वाले अवसरों की सक्रिय रूप से तलाश कर रहे हैं या ऐसे अवसरों के लिए खुले हुए हैं। इससे रोजगार बाजार में प्रतिस्पर्धा और नौकरी बदलने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

इसके अलावा अतिरिक्त आय के स्रोतों की ओर भी कर्मचारियों का झुकाव तेजी से बढ़ रहा है। लगभग 14प्रतिशत कर्मचारी नियमित रूप से अतिरिक्त कार्य या स्वतंत्र पेशेवर सेवाओं के माध्यम से आय अर्जित कर रहे हैं। वहीं, 19 प्रतिशत कर्मचारी समय-समय पर ऐसी गतिविधियों से कमाई करते हैं। इसके अतिरिक्त 24 प्रतिशत कर्मचारी भविष्य में आय का कोई अतिरिक्त स्रोत शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर लगभग 6 में से 10 कर्मचारी या तो पहले से अपनी मुख्य आय के अलावा अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं या फिर ऐसा करने की योजना बना रहे हैं। यह संकेत देता है कि कर्मचारी अब केवल वेतन वृद्धि पर निर्भर रहने के बजाय अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए आय के विभिन्न स्रोत विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।



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