वैश्विक ऋण मूल्यांकन संस्था फिच रेटिंग्स ने पश्चिम एशिया में जारी संकट और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। संस्था का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा लागत में संभावित बढ़ोतरी का असर आने वाली तिमाहियों में आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है, जिससे विकास की गति कुछ धीमी हो सकती है। फिच ने अपनी नवीनतम वैश्विक आर्थिक रिपोर्ट में कहा है कि मार्च में जारी अनुमान की तुलना में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वृद्धि दर के अनुमान में 0.3 प्रतिशत अंक की कटौती की गई है। संस्था के अनुसार घरेलू मांग भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि का प्रमुख आधार बनी रहेगी। हालांकि वास्तविक आयात में कमी आने से शुद्ध बाहरी मांग का योगदान सकारात्मक रहने की संभावना है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को कुछ सहारा मिलेगा।
रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम एशिया का संकट धीरे-धीरे कम होने पर वित्त वर्ष 2027-28 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर फिर से मजबूत हो सकती है। फिच ने अगले वित्त वर्ष के लिए 6.7प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान जताया है। संस्था का कहना है कि उपभोक्ता खर्च और निवेश गतिविधियों में मजबूती आने से अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इसके बाद वित्त वर्ष 2028-29 में वृद्धि दर सामान्य स्तर पर आते हुए 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कॉल्टन ने कहा कि तेल कीमतों में आया झटका वैश्विक आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है और इससे जोखिम बढ़ रहे हैं। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर खर्च में तेज वृद्धि देखने को मिल रही है, जो निकट अवधि में आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रही है। विशेष रूप से एशियाई देशों को इसका लाभ मिल सकता है।
महंगाई को लेकर फिच ने कहा कि भारत में उपभोक्ता मूल्य वृद्धि अभी तक बहुत अधिक नहीं बढ़ी है, लेकिन आने वाले महीनों में इसमें लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। संस्था का अनुमान है कि वर्ष 2026 के अंत तक खुदरा महंगाई दर 5.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके पीछे आधार प्रभाव, ऊर्जा कीमतों में वृद्धि, सामान्य से कम मानसून की आशंका तथा देश के कुछ हिस्सों में जारी भीषण गर्मी जैसी परिस्थितियां प्रमुख कारण हो सकती हैं। यदि मौसम संबंधी चुनौतियां बनी रहती हैं तो खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में अपेक्षा से अधिक बढ़ोतरी हो सकती है।
भारतीय मुद्रा को लेकर फिच ने अपेक्षाकृत संतुलित दृष्टिकोण व्यक्त किया है। संस्था का कहना है कि वर्ष के शेष भाग में भारतीय रुपया में किसी बड़ी अतिरिक्त गिरावट की संभावना नहीं दिख रही है। इससे आयात लागत और वित्तीय स्थिरता पर दबाव सीमित रह सकता है। उल्लेखनीय है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत रखा है। केंद्रीय बैंक के अनुसार पहली तिमाही में 6.6 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.3 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हो सकती है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने यह भी चेतावनी दी है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और मौसम संबंधी जोखिम घरेलू आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

