फ्रांस में 14 जून से 16 जून तक आयोजित होने वाले Bharat Innovates 2026 कार्यक्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) देश की अत्याधुनिक तकनीकों, रणनीतिक अनुसंधान पहलों और संस्थान से जुड़े नवाचार आधारित उद्यमों का प्रदर्शन करेगा। इस अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों और केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित तकनीकी संस्थानों से उभर रहे उत्कृष्ट प्रौद्योगिकी उद्यमों की पहचान करना, उनका मार्गदर्शन करना और उन्हें वैश्विक मंच प्रदान करना है।
आईआईटी मद्रास के अनुसार, यह कार्यक्रम भारतीय नवाचारकर्ताओं को निवेशकों, नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी विशेषज्ञों, अनुसंधान संस्थानों और प्रौद्योगिकी साझेदारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर देगा। संस्थान इस आयोजन में कुल 13 विषयगत क्षेत्रों में से 2 प्रमुख क्षेत्रों का नेतृत्व करेगा और अपने संरक्षण में विकसित 15 नवाचार आधारित उद्यमों को प्रदर्शित करेगा। संस्थान के मंडप में 5 प्रमुख अनुसंधान परियोजनियां प्रस्तुत की जाएंगी, जो भारत की अत्याधुनिक तकनीकी क्षमता और स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को दर्शाएंगी। इनमें हाइपरलूप तकनीक, प्रयोगशाला में विकसित हीरा तकनीक, 5G और 6G संचार प्रणाली, बंदरगाह स्वचालन तथा कम संगणन क्षमता वाले स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तंत्र शामिल हैं।
आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि ने कहा कि India-France Year Of Innovation 2026 और Bharat Innovates 2026 दोनों देशों के बीच अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी सहयोग को नई दिशा देंगे। उन्होंने बताया कि इस आयोजन से 6G तकनीक, साझा परीक्षण अवसंरचना, मानक विकास, नवाचार आधारित उद्यम साझेदारी, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा प्रतिभा विनिमय कार्यक्रमों में सहयोग के नए अवसर खुलेंगे। कार्यक्रम में आईआईटी मद्रास Blue Economy और Next-Generation Communications विषयगत क्षेत्रों का नेतृत्व करेगा। संचार क्षेत्र में प्रदर्शित किए जाने वाले उद्यमों में रेइओ सिस्टम्स, एस्ट्रोम टेक्नोलॉजीज़ और वाइसिग नेटवर्क्स शामिल हैं। ये संस्थान स्वदेशी सॉफ्टवेयर-आधारित रेडियो प्लेटफॉर्म, वायरलेस बैकहॉल प्रणाली और Open RAN आधारित 5G समाधान विकसित कर रहे हैं।
वहीं Blue Economy क्षेत्र में आईआईटी मद्रास से जुड़े प्लैनिस टेक्नोलॉजीज़ द्वारा समुद्र के भीतर निरीक्षण करने वाली तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह तकनीक दूरस्थ रूप से संचालित वाहनों, स्वायत्त प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निदान प्रणाली पर आधारित है, जो समुद्री तथा अपतटीय अवसंरचना की निगरानी में उपयोगी साबित हो रही है। एक अन्य नवाचार आधारित उद्यम जीरोसर्कल समुद्री शैवाल से तैयार प्राकृतिक बहुलक पदार्थों का प्रदर्शन करेगा। इन पदार्थों को पारंपरिक प्लास्टिक पैकेजिंग के टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल विकल्प के रूप में विकसित किया गया है।
प्रदर्शनी में आईआईटी मद्रास का हाइपरलूप अनुसंधान कार्यक्रम भी प्रमुख आकर्षण रहेगा। रेल मंत्रालय ने संस्थान को हाइपरलूप तकनीक के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नामित किया है। संस्थान टुट्र हाइपरलूप के साथ मिलकर प्रणोदन, उत्तोलन और निर्वात नलिका तकनीकों पर कार्य कर रहा है। इसके अलावा भारतीय प्रयोगशाला विकसित हीरा केंद्र द्वारा विकसित तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इनमें लेजर आधारित ऐसी तकनीक शामिल है, जो हीरों के भीतर अदृश्य पहचान चिह्न अंकित कर सकती है। इससे हीरों की प्रामाणिकता और उनकी पहचान को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकेगा।
आईआईटी मद्रास अपने स्वदेशी 5G और 6G समाधान, स्मार्ट बंदरगाह स्वचालन प्रणाली तथा कम संगणन क्षमता वाले कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल भी प्रदर्शित करेगा। इन तकनीकों का विकास आईआईटीएम प्रवर्तक टेक्नोलॉजीज़ फाउंडेशन के माध्यम से किया जा रहा है। संस्थान का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच भारतीय नवाचारों को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी और नवाचार आधारित उद्यमों के विस्तार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

