New Delhi,
भारत के smartphone बाज़ार में वर्ष 2026 की January-March तिमाही में गिरावट दर्ज की गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में shipments में वर्ष-दर-वर्ष 3 प्रतिशत की कमी आई, जो पिछले छह वर्षों में पहली तिमाही का सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि इस गिरावट के पीछे supply side पर बढ़ती लागत, कंपनियों द्वारा कीमतों में वृद्धि और उपभोक्ता मांग में कमजोरी जैसे कई कारण रहे। नए मॉडल की संख्या अधिक होने के बावजूद बिक्री में अपेक्षित बढ़त नहीं हो सकी। बढ़ती component लागत को संतुलित करने के लिए कंपनियों ने अपने कई नए मॉडल पहले ही तिमाही में पेश कर दिए। कुल लॉन्च में लगभग एक-तिहाई हिस्सेदारी ऐसे मॉडलों की रही, जिन्हें लागत वृद्धि के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से पहले लाया गया। विशेष रूप से memory की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और मुद्रा उतार-चढ़ाव ने कंपनियों की लागत को प्रभावित किया।
विश्लेषक प्राचीर सिंह के अनुसार, बाज़ार में affordability पर स्पष्ट दबाव दिखाई दे रहा है। memory आधारित लागत वृद्धि और मुद्रा प्रभाव के कारण कंपनियों को अपने प्रमुख मॉडल की कीमतें बढ़ानी पड़ीं। उन्होंने बताया कि औसतन कीमतों में 1,500 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे 15,000 रुपये से कम कीमत वाले वर्ग पर सबसे अधिक असर पड़ा है। मध्य पूर्व क्षेत्र में जारी geopolitical तनाव के कारण ऊर्जा लागत भी बढ़ी है, जिसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ा है। उपभोक्ता अब आवश्यक खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं और smartphone जैसे वैकल्पिक खरीद को टाल रहे हैं। इसके चलते नए फोन खरीदने का अंतराल भी बढ़ गया है और सस्ते वर्ग में सुधार धीरे-धीरे होने की संभावना है।
कंपनियों का प्रदर्शन
कंपनियों में Samsung दूसरे स्थान पर रही, जहां उसके सामान्य वर्ग के उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद मिला और नए प्रमुख मॉडल को भी मजबूत बुकिंग प्राप्त हुई। वहीं Apple ने premium वर्ग में स्थिर वृद्धि बनाए रखी और उसकी हिस्सेदारी 9 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके पीछे नए iPhone मॉडल की मांग और आसान वित्तीय विकल्पों का योगदान रहा। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि premium वर्ग अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है, जबकि entry-level वर्ग में मांग अभी भी कमजोर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में भी बाज़ार पर दबाव बना रहेगा। April-June तिमाही में दो अंकों की गिरावट देखने को मिल सकती है, जिसका कारण उच्च लागत और सस्ते वर्ग में कमजोर मांग होगी। पूरे वर्ष के लिए अनुमान है कि बाज़ार में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है, क्योंकि memory जैसे प्रमुख घटकों की कीमतों में लगातार वृद्धि उपभोक्ताओं की क्षमता को प्रभावित कर रही है और नए फोन खरीदने में देरी हो रही है।

