मिडिल ईस्ट तनाव को लेकर बाईस दिन से ज्यादा समय निकल चुका है, लेकिन अभी तक युद्ध की समाप्ति की कोई संभावना नहीं आती नजर आ रही है। ईरान-इजरायल और अमेरिका अपनी-अपनी बातों पर अडिग हैं। ऐसे में भारत भी एकजुटता की बीन बजाकर आगे की तैयारी को मजबूत करने में जुटा हुआ है। होना भी यही चाहिए, अगर कोई देश सुझावों पर अमल नहीं करे तो अपने देश के हितों को लेकर आगे बढऩा चाहिए। यह भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की सार्थक पहल कही जा सकती है।
भारत के प्रधानमंत्री Modi ने पिछले दिनों ही Lok Sabha और Rajya Sabha में सदस्यों के समक्ष अपनी तैयारियों की रूपरेखा रखकर मध्य पूर्व की हालात को चिंताजनक बताया है। उन्होंने कहा है कि भारत के सामने अप्रत्याशित आर्थिक, national security और मानवीय चुनौतियां हैं। उन्होंने देश को आश्वस्त किया है कि सरकार किसी भी तरह के संकट से निपटने के लिए अपनी तैयारी कर चुकी है और देश में किसी भी fuel crisis नहीं होगी। भारतीय मिशन 24/7 काम कर रहे हैं, control room setup किए गए हैं।
अब तक तीन लाख से ज्यादा लोग भारत लौट चुके हैं। ईरान से एक हजार भारतीय वापस लौटे हैं, इसमें 700 युवा हैं। देश अपनी जरूरत का 60 फीसदी LPG आयात करता है, देश में LPG का production बढ़ाया जा रहा है। सरकार संवेदनशील और सतर्क है और हर सहायता के लिए तत्पर भी है। कच्चा तेल, गैस और fertilizer Hormuz से आते हैं। प्रयास रहा कि petrol-diesel गैस की supply पर असर न पड़े। PM Modi ने मंत्रियों और मंत्रालयों को alert पर रखते हुए सुरक्षित energy supply सुनिश्चित करने और जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए हैं। भारत ने 7 सशक्त समूहों का गठन किया है, जो ईंधन और supply chain पर युद्ध के प्रभाव का आकलन करेंगे।
वहीं मिडिल ईस्ट निर्भरता कम करने के लिए solar energy, green hydrogen और nuclear energy के उपयोग को तेज करने की रणनीति बनाई है, ताकि देश के निवासियों को भविष्य में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े। PM Modi ने मध्य पूर्व के नेताओं से बात कर तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान का भी आह्वान किया है।

