Saturday, July 11, 2026 |
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भारत का औषधि उद्योग वैश्विक स्तर पर मजबूत, उत्पादन में तीसरा और मूल्य में 11वां स्थान

by Business Remedies
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India's pharmaceutical manufacturing plants and drug production

New Delhi,

भारत का औषधि उद्योग अब एक मजबूत, वैश्विक रूप से जुड़ा हुआ और नीति समर्थन से संचालित तंत्र बन चुका है। आधिकारिक तथ्य पत्र के अनुसार, यह उद्योग उत्पादन के आधार पर दुनिया में तीसरे और मूल्य के आधार पर 11वें स्थान पर पहुंच गया है। देश में 3,000 से अधिक कंपनियां और 10,500 निर्माण इकाइयां कार्यरत हैं।

घरेलू बाजार में तेज विस्तार की संभावना

भारत का घरेलू औषधि बाजार वर्तमान में लगभग 60 अरब डॉलर के मूल्य का है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़कर 130 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में इस क्षेत्र का वार्षिक कारोबार 4.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। पिछले एक दशक (वित्त वर्ष 2015 से 2025) के दौरान औषधि निर्यात में 7 प्रतिशत की वार्षिक संयोजित वृद्धि दर दर्ज की गई है। भारत आज दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन चुका है और वैश्विक आपूर्ति में लगभग 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है। देश में लगभग 60,000 जेनेरिक ब्रांड 60 चिकित्सीय श्रेणियों में तैयार किए जा रहे हैं।

सरकारी योजनाओं और निवेश से मजबूती

मजबूत निर्माण क्षमता, बढ़ते निर्यात, विदेशी निवेश में वृद्धि और सरकार की लक्षित योजनाओं ने घरेलू उत्पादन को सशक्त किया है। इससे आयात पर निर्भरता कम हुई है और वैश्विक बाजार में भारत की भागीदारी बढ़ी है। साथ ही, सस्ती दवाओं की उपलब्धता, नवाचार, गुणवत्ता सुनिश्चितता और नियामक निगरानी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाया है। यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूज़ीलैंड के साथ प्रस्तावित और हाल ही में संपन्न व्यापार समझौतों से औषधि और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इन समझौतों से नए बाजार खुलेंगे और वैश्विक व्यापार संबंध और मजबूत होंगे। भारत में अमेरिका के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) द्वारा अनुमोदित निर्माण संयंत्रों की संख्या अमेरिका के बाहर सबसे अधिक है। यह भारतीय दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर वैश्विक विश्वास को दर्शाता है।

सक्रिय औषधि घटक और टीकों में अग्रणी

देश में लगभग 500 सक्रिय औषधि घटक (API) निर्माता हैं, जो वैश्विक उद्योग का करीब 8 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारत डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खांसी, बीसीजी और खसरा जैसे टीकों की आपूर्ति में भी अग्रणी है। भारत की कंपनियां यूनिसेफ को लगभग 60 प्रतिशत टीकों की आपूर्ति करती हैं। साथ ही, डिप्थीरिया और बीसीजी टीकों की वैश्विक मांग का 40 से 70 प्रतिशत तक भारत से पूरा होता है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की खसरा टीकों की 90 प्रतिशत मांग भारतीय उत्पादों से पूरी होती है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का औषधि निर्यात 30.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो वर्ष 2000-01 के 1.9 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 16 गुना वृद्धि को दर्शाता है। यह भारत के औषधि उद्योग की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भागीदारी को स्पष्ट करता है।



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