New Delhi
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित Free Trade Agreement (FTA) पर सोमवार को हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में बाजार पहुंच को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह समझौता भारत मंडपम में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के उनके समकक्ष टॉड मैक्ले की उपस्थिति में किया जाएगा।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग $5बिलियन तक पहुंचाना है। वैश्विक अनिश्चितताओं, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोल सकता है। इसके साथ ही अगले 15वर्षों में न्यूज़ीलैंड द्वारा भारत में लगभग $20बिलियन का निवेश होने का अनुमान है, जो विनिर्माण, अवसंरचना, सेवाएं, नवाचार और रोजगार सृजन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
इस समझौते के तहत भारतीय कंपनियों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि न्यूज़ीलैंड के लगभग 95प्रतिशत निर्यात पर भारत में शुल्क समाप्त या कम किए जाएंगे। इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन, समुद्री उत्पाद, चेरी, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पाद शामिल हैं।
हालांकि भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर को इस समझौते से बाहर रखा है, ताकि घरेलू किसानों और उद्योगों के हित सुरक्षित रह सकें। वहीं न्यूज़ीलैंड को कीवीफ्रूट और सेब जैसे उत्पादों के लिए कोटा आधारित शुल्क में रियायत दी जाएगी। इसके अलावा भेड़ का मांस, ऊन और वन उत्पादों पर न्यूज़ीलैंड को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, जबकि मनुका शहद, शिशु पोषण उत्पाद और कुछ समुद्री वस्तुओं पर शुल्क में कमी का लाभ भी दिया जाएगा। इस समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता पेशेवरों के लिए बेहतर अवसर है। न्यूज़ीलैंड ने हर वर्ष 5,000 तक भारतीय पेशेवरों को अस्थायी रोजगार वीजा देने पर सहमति जताई है, जिससे वे तीन वर्षों तक वहां काम कर सकेंगे।
यह समझौता गैर-शुल्क बाधाओं को कम करने के लिए नियामकीय सहयोग, सरल कस्टम प्रक्रिया और बेहतर स्वच्छता मानकों को भी बढ़ावा देगा। रविवार को पीयूष गोयल और टॉड मैक्ले ने आगरा में एक उद्योग संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत की विनिर्माण क्षमता और न्यूज़ीलैंड के कच्चे चमड़े के संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दिया। साथ ही आगरा को वैश्विक सोर्सिंग केंद्र, रोजगार सृजन का केंद्र और निर्यात के प्रमुख हब के रूप में विकसित करने की दिशा में चर्चा की गई। आगरा भारत के कुल चमड़ा जूता उत्पादन का लगभग 75प्रतिशत हिस्सा रखता है और इसके चमड़े के जूतों को Geographical Indication (GI) टैग भी प्राप्त है। यह One District One Product योजना के तहत एक प्रमुख उत्पाद भी है।

