New Delhi,
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच Free Trade Agreement (FTA) पर 27 April को हस्ताक्षर होने जा रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। इस समझौते से market access में सुधार होगा और निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे। न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने social media platform X पर जानकारी देते हुए कहा कि दोनों देश सोमवार को इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा।
निर्यातकों को मिलेगा बड़ा लाभ
प्रधानमंत्री लक्सन के अनुसार, यह समझौता विशेष रूप से न्यूज़ीलैंड के उन निर्यातकों के लिए फायदेमंद साबित होगा, जो नावों में उपयोग होने वाले समुद्री जेट सिस्टम का निर्माण करते हैं और उन्हें 70 से अधिक देशों में निर्यात करते हैं। बेहतर market access मिलने से इन उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में कई निर्यातकों को भारतीय बाजार में प्रवेश के दौरान शुल्क (टैरिफ) का सामना करना पड़ता है। FTA लागू होने के बाद इन शुल्कों में धीरे-धीरे कमी आएगी, जिससे व्यापार को गति मिलेगी।
व्यापारिक संबंध और रोजगार में वृद्धि
इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और commercial engagement मजबूत होगा। न्यूज़ीलैंड को इससे व्यापार गतिविधियों में वृद्धि, रोजगार के नए अवसर और आर्थिक विकास में तेजी की उम्मीद है। लक्सन ने कहा कि यह समझौता “अधिक नौकरियां, बेहतर वेतन और अधिक अवसर” लेकर आएगा, जिससे व्यापक आर्थिक प्रभाव देखने को मिलेगा।
निवेश और निर्यात में विस्तार की संभावना
FTA पर हस्ताक्षर के बाद भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में विस्तार होने की संभावना है। यह समझौता वैश्विक बाजार में दोनों देशों के निर्यातकों को अधिक अवसर प्रदान करेगा। इस महीने की शुरुआत में ही इस समझौते की कानूनी जांच पूरी हो चुकी है। न्यूज़ीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने बताया कि 27 April को इस समझौते पर बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्होंने इस समझौते को “एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला अवसर” बताया और कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।
वैश्विक अनिश्चितता के बीच महत्वपूर्ण कदम
मैक्ले ने कहा कि वर्तमान वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करना दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। FTA पर हस्ताक्षर के बाद न्यूज़ीलैंड अपनी संसदीय प्रक्रिया शुरू करेगा, जिससे इस समझौते की सार्वजनिक समीक्षा भी संभव हो सकेगी।

