नई दिल्ली,
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान अनुसूचित जाति के 75 लाख से अधिक लाभार्थियों को कुल 7,981.47 करोड़ रुपये की राशि वितरित की है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई। सरकार के अनुसार, यह राशि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत दी गई है, जिनका मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति के छात्रों के शैक्षिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। इन योजनाओं के माध्यम से वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
छात्रवृत्ति योजनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत खर्च में वर्ष दर वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है। प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में 11.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। इसके अलावा, टॉप क्लास शिक्षा के लिए केंद्रीय क्षेत्र छात्रवृत्ति योजना में 13.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह, लक्षित क्षेत्रों के उच्च विद्यालयों में आवासीय शिक्षा योजना (श्रेष्ठ योजना) के अंतर्गत भी खर्च में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में अधिक है।
सफाई कर्मियों के लिए वित्तीय सहायता में वृद्धि
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त और विकास निगम ने भी वित्त वर्ष 2025-26 में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। निगम ने 29,448 लाभार्थियों को 223.47 करोड़ रुपये की रियायती वित्तीय सहायता प्रदान की, जिनमें लगभग 97 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। निगम द्वारा दिए गए औसत ऋण का आकार बढ़कर 77,000 रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16.67 प्रतिशत अधिक है। निगम की अधिकृत पूंजी 785 करोड़ रुपये और चुकता पूंजी 720 करोड़ रुपये है। अब तक निगम ने कुल 3,340.67 करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए हैं, जिससे 6.08 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है।
सामाजिक उत्थान के लिए निरंतर प्रयास
यह निगम अक्टूबर 1997 से कार्यरत है और सफाई कर्मियों, कचरा बीनने वालों, मैनुअल सफाई कार्य करने वालों तथा उनके आश्रितों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए कार्य कर रहा है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग अन्य पिछड़ा वर्ग, वरिष्ठ नागरिकों, नशा पीड़ितों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, भिक्षावृत्ति में लगे लोगों, विमुक्त और घुमंतू जनजातियों तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए भी विभिन्न योजनाओं का संचालन करता है।

