Saturday, February 14, 2026 |
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समावेशी शिक्षा के लिए भारत को राष्ट्रीय स्तर की AI व्यवस्था की आवश्यकता

by Business Remedies
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AI conclave discussion on education technology and inclusive learning in India

नई दिल्ली,

भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान मजबूत होने के बावजूद उन्हें व्यापक स्तर पर लागू करना, विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करना और एक-दूसरे से जुड़ी प्रणालियाँ बनाना सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह बात देश के विशेषज्ञों ने भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026 में कही, जिसमें शिक्षा और प्रौद्योगिकी से जुड़े अनेक संस्थान शामिल हुए। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि ने कहा कि एआई का उद्देश्य समाज में समावेशन बढ़ाना, भाषाई विविधता को सुरक्षित रखना और सभी विद्यार्थियों को मजबूत बनाना होना चाहिए, न कि उनके बीच नई दूरी पैदा करना। उन्होंने बताया कि तकनीक का उपयोग तभी सफल माना जाएगा जब वह देश के हर विद्यार्थी तक समान रूप से पहुंचे।

सम्मेलन में यह भी दोहराया गया कि एआई आधारित शिक्षा परिवर्तन जिम्मेदारी के साथ लागू किया जाना चाहिए। चर्चा के दौरान तीन प्रमुख निष्कर्ष सामने आए — देश में पहले से अच्छे एआई-आधारित शिक्षा समाधान मौजूद हैं लेकिन उन्हें हर छात्र तक पहुंचाने के लिए विस्तार जरूरी है, सीखने के परिणाम सुधारने में शिक्षकों को सहायता सबसे प्रभावी माध्यम है, और अगले चरण में राष्ट्रीय स्तर का समन्वित मंच बनाना आवश्यक होगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनीन्द्र अग्रवाल द्वारा संचालित सत्र में बताया गया कि राज्य अब केवल निगरानी व्यवस्था से आगे बढ़कर एआई समर्थित हस्तक्षेप आधारित प्रशासन की ओर जा रहे हैं। डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से वास्तविक समय में निर्णय लिए जा रहे हैं और अलग-अलग साधनों की जगह छात्र-शिक्षक-विद्यालय की एकीकृत प्रणाली विकसित की जा रही है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, एआई का विस्तार अलग-अलग छोटे समाधान से नहीं बल्कि राज्यव्यापी मंच से संभव होगा।

भारतीय प्रबंधन संस्थान मुंबई के निदेशक प्रोफेसर मनोज कुमार तिवारी के सत्र में बहुभाषी एआई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि तकनीक को एक जैसी डिजिटल पद्धति लागू करने के बजाय शिक्षकों की भूमिका मजबूत करनी चाहिए और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार शिक्षण पद्धति को समर्थन देना चाहिए। अभ्यास आधारित शिक्षण ढाँचे से विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ती देखी गई तथा कई राज्यों ने शिक्षक सहायता, छात्र अध्ययन और प्रशासन में एआई के एकीकृत उपयोग के सफल मॉडल प्रस्तुत किए। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा कि पिछले ढाई दिनों की चर्चा अत्यंत उत्साहजनक रही और इससे स्पष्ट हुआ कि देश के विभिन्न राज्य और संस्थान शिक्षा में एआई को तेजी से शामिल कर रहे हैं। एआई हर बच्चे की आवश्यकता के अनुसार अनुकूलित अध्ययन व्यवस्था बनाकर बड़े स्तर और व्यक्तिगत ध्यान दोनों को एक साथ संभव बनाता है। उन्होंने कहा कि समान अवसर को केंद्र में रखकर ये नवाचार सीखने के परिणाम सुधारेंगे, समावेशन को मजबूत करेंगे और शिक्षक-विद्यार्थी दोनों को सशक्त बनाएंगे।



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