Saturday, August 8, 2026 |
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AI आधारित खेती से बड़ा बदलाव देशभर में सर्वे पूरा

by Business Remedies
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Farmers using digital agriculture platform under Digital Agriculture Mission in India

नई दिल्ली,

केंद्र सरकार ने बताया कि डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत देश में कृषि क्षेत्र के लिए बड़े स्तर पर डिजिटल ढांचा तैयार किया गया है। अब तक 7.63 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं, जबकि 23.5 करोड़ फसल भूखंडों का सर्वेक्षण पूरा किया गया है। सरकार के अनुसार यह पहल किसानों को तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली 66 फसलों और 432 से अधिक कीट प्रकारों को कवर कर रही है। यह प्रणाली 10,000 से अधिक कृषि विस्तार कर्मियों को वास्तविक समय में सलाह उपलब्ध करा रही है, जिससे कीटों की समय रहते पहचान और नियंत्रण संभव हो पा रहा है। सरकार ने बताया कि दिसंबर 2025 तक किसान ई-मित्र चैटबॉट ने 93 लाख से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए हैं। यह प्रतिदिन 8,000 से अधिक किसानों के प्रश्नों का समाधान 11 क्षेत्रीय भाषाओं में कर रहा है। इससे किसानों को तुरंत जानकारी और मार्गदर्शन मिल रहा है।

खरीफ 2025 के लिए स्थानीय मानसून आगमन के पूर्वानुमान हेतु एआई आधारित पायलट परियोजना के माध्यम से 13 राज्यों के 3.88 करोड़ किसानों तक एसएमएस के जरिए सूचना पहुंचाई गई। सर्वे में शामिल 31 से 52 प्रतिशत किसानों ने इन पूर्वानुमानों के आधार पर बुवाई और भूमि तैयारी से जुड़े निर्णयों में बदलाव किया। इसके अलावा यस-टेक, क्रॉपिक और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का व्हाट्सएप चैटबॉट एआई आधारित उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे फसल बीमा प्रक्रिया अधिक नवाचारपूर्ण, तेज और पारदर्शी बन रही है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत-विस्तार नामक बहुभाषी एआई उपकरण का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य एग्रीस्टैक पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पैकेज को एआई प्रणाली से जोड़ना है। एग्रीस्टैक डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन का मुख्य घटक है, जो किसानों को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान प्रदान करता है। यह पहचान भूमि अभिलेख, पशुधन स्वामित्व, उगाई गई फसलों और प्राप्त लाभों से जुड़ी होती है, जिससे किसानों को सुरक्षित पहचान और कृषि सेवाओं तक आसान पहुंच मिलती है।

किसान आईडी के निर्माण और सत्यापन को तेज करने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की प्रशासनिक निधि से प्रति किसान आईडी 10 रुपये निर्धारित किए गए हैं। एग्रीस्टैक मोबाइल आधारित डिजिटल फसल सर्वे का भी समर्थन करता है, जो वास्तविक समय में भूखंड स्तर पर फसल के प्रकार और क्षेत्र की जानकारी दर्ज करता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और अनपेक्षित घटनाओं से होने वाले नुकसान से सुरक्षा देने के लिए की गई थी। इस योजना के तहत खरीफ खाद्यान्न और तिलहन फसलों पर किसान केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम देते हैं, रबी खाद्यान्न और तिलहन फसलों पर 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक तथा बागवानी फसलों पर 5 प्रतिशत प्रीमियम का भुगतान करते हैं। शेष प्रीमियम राशि सरकार द्वारा वहन की जाती है।



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