Monday, March 9, 2026 |
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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क और आवास योजनाओं से गांवों में तेज विकास

by Business Remedies
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Rural infrastructure development and housing projects in India

मुंबई,

केंद्र सरकार के निरंतर राजकोषीय प्रयासों से ग्रामीण भारत में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। आधिकारिक बयान के अनुसार, ग्रामीण विकास के लिए बजट आवंटन पिछले एक दशक में 211 प्रतिशत से अधिक बढ़कर वर्ष 2026-27 में 2.73 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार का कहना है कि इस बढ़े हुए निवेश से बुनियादी ढांचे, आवास, सड़क और सामाजिक सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। बयान में बताया गया कि देश में गरीबी दर में महत्वपूर्ण कमी आई है। वर्ष 2022-23 में अत्यधिक गरीबी घटकर 5.3 प्रतिशत रह गई, जो वैश्विक औसत से कम है। वहीं बहुआयामी गरीबी वर्ष 2005-06 के 55.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2023 में 11.28 प्रतिशत पर आ गई है। यह गिरावट ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम मानी जा रही है।

ग्रामीण संपर्क व्यवस्था लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वर्ष 2016-17 में 12,581 करोड़ रुपये का आवंटन था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 19,000 करोड़ रुपये हो गया है। यह लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। जनवरी 2026 के मध्य तक पात्र बस्तियों में से 99.6 प्रतिशत को इस योजना के अंतर्गत सड़क संपर्क से जोड़ा जा चुका है। आवास के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पिछले 11 वर्षों में 3.70 करोड़ ग्रामीण घरों का निर्माण किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए आवंटन वर्ष 2016-17 के 15,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2026-27 में 54,916.70 करोड़ रुपये हो गया, जो 266 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

सरकार ने विकास के मॉडल में बदलाव पर भी जोर दिया है। बयान में कहा गया है कि अब केवल सरकार आधारित मॉडल के बजाय सामुदायिक भागीदारी और विकेंद्रीकृत व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थानीय निकाय और जमीनी संस्थाएं विकास योजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। पंचायतों को प्रत्यक्ष वित्तीय हस्तांतरण में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। 15वें वित्त आयोग (2021-26) के तहत लगभग 2.36 लाख करोड़ रुपये दिए गए थे, जबकि 16वें वित्त आयोग (2026-31) के अंतर्गत यह राशि बढ़कर लगभग 4.35 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इससे स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता मजबूत हुई है।

महिला समूहों को अंतिम स्तर तक सेवा पहुंचाने का प्रमुख आधार बताया गया है। देशभर में 90.09 लाख स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 10.05 करोड़ महिलाओं को संगठित किया गया है, जिन्हें 9 लाख सामुदायिक कार्यकर्ताओं का सहयोग प्राप्त है। सामाजिक सेवाओं पर व्यय में भी निरंतर वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2022 से 2026 के बजट अनुमान के बीच सामाजिक सेवा व्यय में 12 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि वृद्धि दर्ज की गई। शिक्षा पर व्यय में 11 प्रतिशत और स्वास्थ्य पर 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, घरेलू विद्युतीकरण और स्वच्छता सुविधाओं की पहुंच वर्ष 2016 के 22 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में 64.3 प्रतिशत हो गई है। जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2019 में 3.23 करोड़ परिवारों को नल का जल उपलब्ध था, जो नवंबर 2025 तक बढ़कर लगभग 15.74 करोड़ परिवारों तक पहुंच गया है। Stock Market Update के संदर्भ में विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते निवेश का दीर्घकालिक सकारात्मक प्रभाव व्यापक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जिसका असर आगे चलकर nifty और sensex जैसे प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दे सकता है।



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