Saturday, July 4, 2026 |
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भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र तेजी से विस्तार की ओर, 2028 तक तीन लाख तीस हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान

by Business Remedies
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Graph showing the growth of India's media and entertainment industry

New Delhi,

भारत का मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र वर्ष 2025 में एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है, जहां इसका आकार बढ़कर लगभग दो लाख अठहत्तर हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र ने 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जो देश की सामान्य आर्थिक वृद्धि दर से अधिक है। फिक्की और अर्न्स्ट एंड यंग की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, यह क्षेत्र वर्ष 2026 तक 2.8 प्रतिशत की दर से बढ़कर लगभग दो लाख छियासी हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं वर्ष 2028 तक इसके तीन लाख तीस हजार करोड़ रुपये के स्तर को पार करने का अनुमान है। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल माध्यम इस क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा बनकर उभरा है, जिसकी आय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। कुल विज्ञापन खर्च में डिजिटल विज्ञापनों की हिस्सेदारी 63 प्रतिशत रही। इसके साथ ही ओटीटी प्लेटफॉर्म, प्रीमियम खेल प्रसारण और क्षेत्रीय सामग्री के कारण सदस्यता में भी तेजी से वृद्धि देखी गई है।

टेलीविजन क्षेत्र में गिरावट जारी

इसके विपरीत, टेलीविजन क्षेत्र में धीरे-धीरे गिरावट जारी है। वर्ष 2025 में इसका आकार घटकर लगभग इकसठ हजार सात सौ करोड़ रुपये रह गया। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इसमें औसतन 5 प्रतिशत की नकारात्मक वार्षिक वृद्धि दर देखने को मिल सकती है, हालांकि वर्ष 2028 तक कुल टीवी परिवारों की संख्या बीस करोड़ से अधिक हो सकती है। मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव क्षेत्रीय कहानियों के बढ़ते प्रभाव के रूप में सामने आया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आधे से अधिक उपभोग क्षेत्रीय भाषाओं में हो रहा है, जबकि फिल्मों के निर्माण में भी लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी क्षेत्रीय भाषाओं की हो गई है।

सामग्री निर्माण में रिकॉर्ड वृद्धि

वर्ष 2025 में इस उद्योग ने लगभग दो लाख घंटे की सामग्री तैयार की, जिसमें टेलीविजन की प्रमुख भूमिका रही, जबकि ओटीटी और लघु प्रारूपों ने भी इसमें सहयोग दिया। हालांकि पारंपरिक माध्यमों पर विज्ञापन खर्च में बदलाव और सदस्यता में कमी के कारण दबाव बना हुआ है। विज्ञापन क्षेत्र ने इस उद्योग की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें 13.5 प्रतिशत की वृद्धि के साथ कुल आकार लगभग एक लाख पचास हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसमें डिजिटल माध्यम, ई-कॉमर्स और छोटे एवं मध्यम उद्योगों की भागीदारी प्रमुख रही। लाइव कार्यक्रमों के संगठित क्षेत्र में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें टिकट आधारित कार्यक्रमों, निजी आयोजनों जैसे विवाह, सरकारी कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों जैसे महाकुंभ मेले में बढ़ते खर्च का बड़ा योगदान रहा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कुछ चुनौतियां अभी बनी हुई हैं। भुगतान आधारित टीवी दर्शकों की संख्या में गिरावट, समाचार क्षेत्र में कमजोर आय और गेमिंग क्षेत्र में नियामकीय बदलाव के कारण इस हिस्से में वर्ष 2025 से 2028 के बीच लगभग 22 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि दर देखी जा सकती है।

विशेषज्ञों की राय

अनंत गोयनका ने कहा कि यह क्षेत्र भारत के रचनात्मक और डिजिटल बदलाव का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जो दर्शकों के बदलते व्यवहार और तकनीकी प्रगति से प्रेरित है। वहीं केविन वाज ने वर्ष 2025 को एक निर्णायक मोड़ बताते हुए कहा कि उद्योग अब विस्तार, नवाचार और परिवर्तन के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र वर्ष 2027 तक तीन लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर सकता है और 2028 तक तीन लाख तीस हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा, जिसमें डिजिटल माध्यम, नए रचनात्मक प्रारूप और तकनीकी नवाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।



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