भारत धीरे-धीरे विकसित देशों की दौड़ में शामिल होने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसकी ग्रीन शिपबिल्डिंग के केंद्र के रूप में उभरने की संभावना काफी मजबूत है। सरकार वैकल्पिक ईंधन और नवीकरणीय ऊर्जा पर लगातार जोर दे रही है। भारतीय शिपयार्ड का आधुनिकीकरण और अपग्रेडेशन का कार्य भी इन दिनों जोरों पर चल रहा है। इसके साथ ही पुराने डॉकयार्ड को फिर से खोलने और ग्रीन शिपबिल्डिंग के लिए अधिक क्षमता जोडऩे पर मूल्यांकन किया जा रहा है। वहीं भारत सरकार जापानी और कोरियाई शिपयार्ड से निवेश और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर को प्रोत्साहित कर रही है। एशिया में अधिकांश पारंपरिक जहाज निर्माण यार्ड पूरी तरह से बुक हो चुके हैं, जबकि ग्रीन-मैरीटाइम परिसंपत्तियों की मांग बढ़ रही है। जहां एक ओर जहाज मालिक नई पर्यावरण के अनुकूल परिसंपत्तियों में निवेश कर रहे हैं और प्रतिस्पर्धी मूल्य वाले यार्ड स्पेस की तलाश कर रहे हैं। डीएनवी ने वर्ष, 2023 में भारतीय तटीय हरित शिपिंग कार्यक्रम शीर्षक से एक श्वेत पत्र प्रकाशित किया, जिसमें भारत की समुद्री उद्योग के लिए स्थायी भविष्य प्रदान करने की क्षमता का अध्ययन किया गया। इस पेपर में तटीय शिपिंग के माध्यम से कार्बन उत्सर्जन को कम करने और नॉर्वे के ग्रीन शिपिंग प्रोग्राम के सफल अनुभव के आधार पर ग्रीन शिपिंग में संक्रमण की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई है। वहीं ग्रीन शिपिंग ईंधन और वैकल्पिक ईंधन की पहुंच के साथ हाइब्रिड मॉडल पर चलने वाले सहायक जहाजों के लिए भारतीय बंदरगाह के बुनियादी ढांचे का अपग्रेडेशन भी चल रहा है। यह एक दीर्घकालिक ईंधन विकास योजना है, जिसे आने वाले वर्षों में लागू किया जाएगा। भारत ने वर्ष,2030 तक शीर्ष 10 जहाज निर्माण देशों में और 2047 तक शीर्ष पांच में शामिल होने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इससे लगता है जल्द ही भारत ग्रीन शिपबिल्डिंग के रूप में उभरेगा।

