New Delhi,
भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है और वित्त वर्ष 2024-25 में कुल प्रीमियम 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। सरकार ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इस क्षेत्र में लगभग 9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र की इस वृद्धि के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें लोगों में जागरूकता का बढ़ना, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वित्तीय सुविधा की उपलब्धता और चिकित्सा खर्चों से सुरक्षा की बढ़ती आवश्यकता शामिल है। इन कारकों ने बीमा योजनाओं की मांग को लगातार बढ़ाया है। बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और बीमाधारकों को तेजी से सहायता उपलब्ध कराने के लिए सख्त समय-सीमा निर्धारित की है। नए नियमों के अनुसार, बीमा कंपनियों को कैशलेस उपचार के लिए पूर्व स्वीकृति अनुरोध को एक घंटे के भीतर मंजूरी देनी होगी, जबकि अंतिम स्वीकृति अधिकतम तीन घंटे के भीतर पूरी करनी होगी।
सरकार के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य उपचार में होने वाली देरी को कम करना और मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम में वृद्धि के पीछे कई कारण बताए गए हैं। इनमें बीमाधारकों की बढ़ती आयु, अधिक कवरेज राशि का चयन और योजनाओं में बेहतर सुविधाओं का शामिल होना प्रमुख हैं। वर्ष 2024 के दिशा-निर्देशों के तहत यह भी सुनिश्चित किया गया है कि बीमा उत्पादों का मूल्य निर्धारण जोखिम के आधार पर उचित तरीके से किया जाए और समय-समय पर आंकड़ों व उपभोक्ता प्रतिक्रिया के आधार पर इसकी समीक्षा हो।
दावों के निपटान के मामले में भी इस क्षेत्र में सुधार देखा गया है। वर्ष 2024-25 में दावा भुगतान अनुपात 87.5 प्रतिशत रहा, जो वर्ष 2023-24 में 82.46 प्रतिशत और वर्ष 2022-23 में 85.66 प्रतिशत था। यह दर्शाता है कि बीमा कंपनियां दावों के निपटान में पहले की तुलना में अधिक सक्षम हुई हैं। आईआरडीएआई के बीमा भरोसा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में सामान्य और स्वास्थ्य बीमा से जुड़े 1,37,361 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से लगभग 93 प्रतिशत शिकायतों का समाधान उसी वित्त वर्ष के भीतर कर दिया गया।
हालांकि, कुछ दावे अभी भी विभिन्न कारणों से अस्वीकृत हो रहे हैं। इनमें बीमा राशि की सीमा से अधिक खर्च, सह-भुगतान शर्तें, उप-सीमाएं, कटौती प्रावधान, कमरे के किराये की सीमा और गैर-चिकित्सीय खर्च जैसे कारण शामिल हैं। नियामक द्वारा पारदर्शिता बढ़ाने और दावा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य बीमाधारकों के बीच विश्वास बढ़ाना और देश में स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था को अधिक प्रभावी तथा भरोसेमंद बनाना है।

