भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि अधिकांश महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों देश ऐसे समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जिससे भारत को अन्य प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर व्यापारिक लाभ मिल सके।
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में उन्हें किसी बड़ी बाधा की आशंका नहीं है। उन्होंने बताया कि रियायतों सहित अधिकांश प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बन चुकी है और भारत लगातार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि उसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर बाजार पहुंच मिले। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भी भारत की इस मांग को समझा है और बातचीत इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
पीयूष गोयल ने बताया कि अमेरिका की सर्वोच्च अदालत द्वारा कुछ शुल्क संबंधी प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद वहां की सरकार एक वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर रही है, जिससे भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनी रहे। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने भी भारत के पक्ष को स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा कि अधिक शुल्क लगाए जाने के बावजूद भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात मजबूत बना हुआ है। दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और चालू वित्त वर्ष की अप्रैल से जून तिमाही में भारत के वस्तु निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत वृद्धि होने का अनुमान है। पीयूष गोयल ने यह भी जानकारी दी कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की कानूनी समीक्षा अगले 10 से12 दिन में पूरी होने की संभावना है। इसके बाद यह मंजूरी की प्रक्रिया में जाएगा। मंत्री ने विश्वास जताया कि वर्ष के अंत तक यह समझौता लागू हो जाएगा, क्योंकि यूरोपीय संघ के सभी 27सदस्य देशों का इसे समर्थन प्राप्त है और किसी भी देश ने बातचीत का विरोध नहीं किया है। पीयूष गोयल ने भारत और जापान के आर्थिक संबंधों को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अब दोनों देशों के रिश्तों का अगला चरण केवल निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, प्रौद्योगिकी सहयोग और कुशल कार्यबल की आवाजाही को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उनके अनुसार जापान, भारत की दीर्घकालिक आर्थिक विकास रणनीति का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।

