New Delhi,
देश में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य बीमा कवरेज में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। सरकार द्वारा जारी सर्वेक्षण के अनुसार, वर्ष 2017–18 की तुलना में वर्ष 2025 तक ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बीमा कवरेज तेजी से बढ़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां पहले करीब 14 प्रतिशत आबादी बीमा के दायरे में थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 47 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 19 प्रतिशत से बढ़कर करीब 44 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह आंकड़े सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ‘हाउसहोल्ड सोशल कंजम्प्शन: हेल्थ’ सर्वेक्षण से सामने आए हैं, जिसे जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच संचालित किया गया था।
इलाज पर खर्च का बोझ अब भी बना चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 365 दिनों में अस्पताल में भर्ती (प्रसव को छोड़कर) होने पर प्रति मरीज औसत जेब से खर्च लगभग 34,064 रुपये रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में यह खर्च करीब 31,484 रुपये और शहरी क्षेत्रों में लगभग 38,688 रुपये दर्ज किया गया। हालांकि, यदि मध्यम खर्च की बात करें तो यह लगभग 11,285 रुपये रहा, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 10,500 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 12,400 रुपये खर्च सामने आया।
सरकारी अस्पतालों में कम खर्च, कई मामलों में मुफ्त इलाज
सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि सरकारी अस्पतालों में इलाज अपेक्षाकृत सस्ता रहा। देशभर में प्रति भर्ती मरीज औसत खर्च करीब 6,631 रुपये रहा, जबकि आधे मरीजों का इलाज 1,100 रुपये या उससे कम में हो गया। बाह्य रोगी सेवाओं के मामले में पिछले 15 दिनों के दौरान औसत खर्च लगभग 861 रुपये रहा। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 847 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 884 रुपये दर्ज किया गया। मध्यम खर्च करीब 400 रुपये रहा। सरकारी अस्पतालों में बाह्य रोगी सेवाओं के लिए औसत खर्च केवल 289 रुपये रहा, जबकि आधे मामलों में मरीजों को पूरी तरह मुफ्त इलाज मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान औसत खर्च लगभग 2,299 रुपये रहा, जबकि सभी अस्पतालों को मिलाकर यह खर्च 14,775 रुपये तक पहुंच गया। मध्यम खर्च के आंकड़े भी यही अंतर दिखाते हैं। सरकारी अस्पतालों में यह 801 रुपये रहा, जो अन्य अस्पतालों के 2,851 रुपये की तुलना में काफी कम है।
बीमारियों का पैटर्न और आयु समूह का प्रभाव
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि सर्वेक्षण की तारीख से पहले के 15 दिनों में लगभग 13.1 प्रतिशत लोगों ने खुद को बीमार बताया। शहरी क्षेत्रों में यह अनुपात 14.9 प्रतिशत रहा, जो ग्रामीण क्षेत्रों के 12.2 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। आयु वर्ग के अनुसार, 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों में बीमारी की सबसे अधिक दर 43.9 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद 45 से 59 वर्ष आयु वर्ग में 22.5 प्रतिशत और 0 से 4 वर्ष के बच्चों में 9.9 प्रतिशत लोग बीमार पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, बचपन और किशोरावस्था में संक्रमण और श्वसन संबंधी बीमारियां सबसे अधिक देखी गईं। वहीं युवावस्था में मानसिक, तंत्रिका और पाचन संबंधी समस्याएं अधिक सामने आईं। 30 वर्ष की आयु के बाद गैर-संचारी रोग जैसे हृदय संबंधी समस्याएं (उच्च रक्तचाप) और चयापचय संबंधी रोग (मधुमेह) तेजी से बढ़ते हुए पाए गए।

