Wednesday, May 20, 2026 |
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भारत में गिग भर्ती का बदलता स्वरूप, छोटे शहर बन रहे नए केंद्र

by Business Remedies
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Gig Hiring in India and Growing Employment Opportunities in Small Towns

New Delhi,

देश में गिग भर्ती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब यह केवल अधिक संख्या में रोजगार देने तक सीमित नहीं रहकर कौशल आधारित व्यवस्था में बदल रहा है। नई रिपोर्ट के अनुसार, अब कंपनियां उच्च कौशल वाले कार्यों, बड़े संगठनों की जरूरतों और छोटे शहरों के प्रतिभाशाली लोगों पर अधिक ध्यान दे रही हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि मार्च महीने में कुल भर्ती गतिविधियों में कुछ नरमी देखी गई। मासिक आधार पर भर्ती सूचकांक में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि सालाना आधार पर इसमें 1 प्रतिशत की हल्की बढ़त बनी रही।

सफेदपोश गिग नौकरियों में लगातार बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, सफेदपोश गिग नौकरियां वित्त वर्ष 2025 में 68 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 82.3 लाख हो गई हैं। अनुमान है कि यह संख्या वित्त वर्ष 2027 तक 1 करोड़ 2 लाख से अधिक हो सकती है। इसके साथ ही परियोजना आधारित भर्ती अब धीरे-धीरे मुख्यधारा का हिस्सा बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े संगठन अब विशेष कौशल की कमी को पूरा करने के लिए गिग भर्ती का सहारा ले रहे हैं। खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित और वरिष्ठ स्तर के पदों पर यह रुझान तेजी से बढ़ रहा है, जहां तेजी और लचीलापन बेहद जरूरी होता है।

छोटे शहर बन रहे प्रतिभा के नए केंद्र

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि देश के दूसरे स्तर के शहर यानी टियर-2 शहर अब गिग भर्ती के बड़े केंद्र बनकर उभर रहे हैं। इन शहरों में दूरस्थ और मिश्रित कार्य व्यवस्था को तेजी से अपनाया जा रहा है, जिससे कंपनियों को व्यापक स्तर पर प्रतिभा तक पहुंच मिल रही है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक गिग भर्ती में टियर-2 शहरों की हिस्सेदारी बढ़कर 38.8 प्रतिशत हो जाएगी, जो वर्तमान में लगभग 30.7 प्रतिशत है। कोयंबटूर, वडोदरा, कोच्चि और इंदौर जैसे शहर तेजी से प्रमुख प्रतिभा केंद्र बन रहे हैं। सूचना प्रौद्योगिकी सेवाएं, आंकड़ा विश्लेषण, विनिर्माण, वैश्विक क्षमता केंद्र से जुड़े कार्य, डिजिटल विपणन और दूरस्थ तकनीकी कार्यों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इसके अलावा जयपुर, चंडीगढ़, भुवनेश्वर और लखनऊ जैसे शहर भी रचनात्मक, परामर्श, विश्लेषण और सहयोगी कार्यों में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अब गिग व्यवस्था अधिक व्यापक और संतुलित हो रही है, जहां महानगरों के बाहर के शहर भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।



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