बिजऩेस रेमेडीज/नई दिल्ली/आईएएनएस | अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल बेंचमार्क मानती हैं और भारतीय Unified Payments Interface (UPI) ने दिखाया है कि सरकारी मॉडल प्राइवेट नेटवर्क्स को पछाड़ सकते हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई। Interest.co.nz की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम UPI ने दिखाया है कि समावेशन और विस्तार को एक साथ बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, इस बात को साबित किया कि सरकारी पेमेंट मॉडल भी निजी नेटवर्क को पीछे छोड़ सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि UPI के जरिए एक अरब लोगों के बीच प्रति वर्ष 170 अरब से अधिक बार, तत्काल और किफायती रूप से पैसों का हस्तांतरण करके भारत ने यह साबित कर दिया कि ‘विश्व के डिजिटल फाइनेंशियल हाइवे एक दिन देश से होकर गुजर सकते हैं’ और ‘एक वैश्विक आर्थिक और उच्च-तकनीकी महाशक्ति’ के रूप में अपने उदय का संकेत दिया है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘एक ऐसा देश, जिसने पहले के समय में विदेशी मुद्रा की कमी और बाहरी खतरों को झेला है, पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में इस तरह की महारत हासिल करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत डिजिटल भुगतान को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में देखता है, न कि किसी प्रीमियम निजी सेवा के रूप में। यह बात UPI की 2024 तक 4 करोड़ सामान्य उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने से स्पष्ट होती है, जो 2017 में 3 करोड़ थे। UPI की तुलना अमेरिका के Visa और Mastercard जैसे भुगतान नेटवर्क से करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का एक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, जो उपभोक्ताओं के लिए नि:शुल्क है, पहले से ही दुनिया के निजी भुगतान दिग्गजों के बराबर प्रतिस्पर्धा कर रहा है और उनसे कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है।
चीन के Alipay और WeChat Pay की तुलना UPI से करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रणालियों के विपरीत, भारत का नेटवर्क एक खुला और पूरी तरह से अंतरसंचालनीय सार्वजनिक मंच है जिससे हर बैंक और फिनटेक कंपनी जुड़ सकती है। रिपोर्ट में Reserve Bank of India के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में कुल डिजिटल भुगतान में UPI का हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक है और देश में लगभग सभी भुगतान डिजिटल माध्यमों से ही होते हैं।




