नई दिल्ली,
पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री नाकेबंदी के बीच भारत से जुड़ा एक LPG टैंकर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण Strait Of Hormuz को सफलतापूर्वक पार कर गया है। इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कई सप्ताहों से इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित थी। जहाज निगरानी आंकड़ों के अनुसार Marshall Islands ध्वज वाला पोत सर्व शक्ति शनिवार को ईरान के लारक और क़ेश्म द्वीपों के पास से गुजरते हुए Gulf Of Oman में प्रवेश कर गया। इस जहाज में लगभग45,000टन LPG भरा हुआ है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू रसोई गैस के रूप में किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार यह पोत भारत की ओर बढ़ रहा है। सर्व शक्ति एक विशाल गैस वाहक जहाज है, जो पहले भी फारस की खाड़ी और भारतीय बंदरगाहों के बीच संचालन करता रहा है। वर्तमान में यह जहाज अपने भारतीय गंतव्य और चालक दल की जानकारी प्रसारित कर रहा है। क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद इस मार्ग से गुजरने वाले जहाज सुरक्षा कारणों से इस प्रकार की जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा कर रहे हैं, ताकि जोखिम कम किया जा सके।
इस यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ईरान से जुड़े जहाजों पर अमेरिका समर्थित नाकेबंदी लागू होने के बाद यह भारत से जुड़ा पहला प्रमुख टैंकर माना जा रहा है जिसने यह मार्ग पार किया है। इन प्रतिबंधों के कारण Strait Of Hormuz से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या लगभग शून्य स्तर तक पहुंच गई थी। इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर भारी असर पड़ा और तेल-गैस आपूर्ति शृंखला बाधित हुई।
सर्व शक्ति उन सबसे बड़े जहाजों में शामिल है जिन्होंने हाल के समय में इस मार्ग से यात्रा की है। पिछले महीने थोड़े समय के लिए समुद्री रास्ता खोला गया था, लेकिन जल्द ही दोबारा कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए थे। इसी बीच पिछले महीने यह भी खबर सामने आई थी कि पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद पहला LNG जहाज भी इस जलमार्ग से गुजरता दिखाई दिया था। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत की उम्मीद जगी थी।
मुबराज़ नामक LNG टैंकर, जिसने अबू धाबी की Das Island सुविधा से माल भरा था, भारत के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र के पास देखा गया था। यह जहाज कई सप्ताह तक फारस की खाड़ी में रुका रहा और मार्च अंत में संकेत देना बंद कर दिया था। बाद में यह भारत के पश्चिमी समुद्री क्षेत्र के पास दोबारा सक्रिय दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होती है, तो भारत सहित कई देशों को गैस आपूर्ति राहत मिल सकती है और ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।



