देश को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और दीर्घकालिक योजना India Battery Vision तैयार किया जा रहा है। इसके तहत भारत का मुख्य लक्ष्य ऊर्जा के क्षेत्र में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना और नवीकरणीय ऊर्जा के भंडारण में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करना है।
इसके तहत वर्ष 2030-35 तक एक ऐसी पूर्ण बैटरी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य है, जिसमें खनन, रिफाइनिंग, सेल निर्माण, बैटरी पैक, ऊर्जा भंडारण और रीसाइक्लिंग सब देश के भीतर हो। लक्ष्य केवल EV बैटरी बनाना नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक बैटरी निर्माण और निर्यात हब बनाना है।
हालांकि दिशा सही है, लेकिन वर्तमान प्रगति को देखते हुए पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने में 2030 के बाद भी कुछ समय लग सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रगति अपेक्षा से धीमी रही है। जहां ACC-PLI योजना के तहत 50 GWh क्षमता का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 2025-26 तक उसका छोटा हिस्सा ही चालू हो पाया है।
भारत अभी मुख्यत: China, South Korea और Japan से बैटरी सेल आयात करता है। विजन का लक्ष्य देश में ही ACC बनाना है। वर्तमान में भारत अपनी Lithium-Ion Battery की जरूरतों के लिए ज्यादातर आयात पर निर्भर है।
घरेलू Giga-Factories और बैटरी रीसाइक्लिंग के विस्तार से देश के भीतर ही पूरी Supply Chain तैयार हो जाएगी। जैसे-जैसे भारत Grid-Scale Battery Storage क्षमता विकसित करेगा, सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली बिजली को बिना रुकावट के स्टोर किया जा सकेगा।
सरकार द्वारा संचालित PLI ACC योजना के तहत कंपनियों को अनिवार्य रूप से कम से कम 25 फीसदी से लेकर 60 फीसदी तक का घरेलू मूल्यवर्धन करना होता है। स्थानीय विनिर्माण से जुड़ी तकनीक में दक्षता, तकनीकी प्रशिक्षण, नए उद्योगों का विकास और लाखों की संख्या में रोजगार सृजित होंगे, जिससे आर्थिक आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।

