नई दिल्ली,
केंद्र सरकार देश के विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए लगभग ₹.5000करोड़ की क्रेडिट सहायता योजना पर विचार कर रही है। यह कदम वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण प्रभावित उद्योगों को सहारा देने के व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्तावित योजना को Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) के तहत लागू किया जा सकता है। सरकार लगभग ₹.2.5लाखकरोड़ के विस्तारित राहत पैकेज पर भी काम कर रही है, जिसका उद्देश्य कई प्रभावित क्षेत्रों को समर्थन देना है।
सूत्रों के मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक विमानन कंपनी को करीब ₹.1000करोड़ तक की क्रेडिट सीमा मिल सकती है। यह क्रेडिट सरकारी गारंटी के साथ उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें कर्ज पर लगभग 90प्रतिशत तक की गारंटी दी जा सकती है। बताया जा रहा है कि यह योजना पांच वर्षों तक लागू रह सकती है और आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक अनिश्चितताओं के आर्थिक प्रभाव को कम करना और विमानन क्षेत्र को स्थिरता प्रदान करना है।
वर्तमान समय में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से अमेरिका-ईरान संघर्ष, ने विमानन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा दिया है। ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही बाधाओं का सीधा असर इस क्षेत्र पर पड़ रहा है। इससे पहले इसी महीने नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने DGCA द्वारा स्वीकृत Flying Training Organisation (FTO) की ranking का दूसरा चरण जारी किया था। इसमें प्रशिक्षण गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है और एक संस्थान पहली बार शीर्ष ‘A’ श्रेणी में शामिल हुआ है।
यह ranking प्रणाली नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू के मार्गदर्शन में तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य देशभर के प्रशिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है। एक अन्य निर्णय में मंत्री ने घरेलू विमानन कंपनियों के लिए प्रमुख हवाईअड्डों पर landing और parking शुल्क में 25प्रतिशत की कटौती की घोषणा की थी, ताकि बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच हवाई किराए को किफायती बनाए रखा जा सके।




