बारिश का मौसम शुरू होने साथ ही सीजनल बीमारियों का प्रकोप बढ़ गया है। इन दिनों मच्छरों का डंक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों पर भारी पड़ रहा है। बीमा कंपनियों को मिले हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम्स में से लगभग एक तिहाई की वजह मौसमी संक्रामक बीमारियां है। इनमें मच्छर की वजह से फैलने वाली डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां शामिल हैं। जुलाई और अगस्त के महीनों में मच्छर के काटने से होने वाली बीमारियों को दावों में तेजी आई है। साथ ही गंदे पानी से होने वाली पेट की बीमारियों के लिए भी हेल्थ इंश्योरेंस के दावे भी बढ़ गए हैं। इसी तरह सर्दियों में ब्रोंकाइटिस या इन्फ्लूएंजा का प्रकोप बढ़ जाता है। इसमें से कई बीमारियों के सीधा संबंध गंदगी से है। यानी साफ-सफाई से इस तरह की बीमारियों और उनसे जुड़े हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम्स को टाला जा सकता है। आंकड़े बताते हैं कि इन बीमारियों से समाज का हरेक वर्ग प्रभावित होता है। हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम स्टडी के मुताबिक मौसमी बीमारियों के कुल दावों में डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छर से होने वाली बीमारियों का हिस्सा 15 फीसदी है। जुलाई और अगस्त में इन बीमारियों से जुड़े हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम बढ़ जाते हैं। इसकी वजह यह है कि बारिश का मौसम मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श होता है। एक और बीमारी जो मानसून के दौरान चरम पर होती है, वह है गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट की बीमारी। इसके इलाज का खर्च मलेरिया जितना ही है। सीजनल क्लेम्स में इस बीमारी का हिस्सा 18फीसदी है। मौसमी बीमारियों के दावों में एलर्जी की हिस्सेदारी 10 फीसदी है। विकसित देशों को देखें, तो वहां मौसमी बीमारियों की हिस्सेदारी विकासशील देशों की तुलना में बहुत कम है। भारत के मामले में गुरुग्राम जैसे देश के विकसित इलाकों में भी जल जमाव और मच्छरों के पनपने की समस्याएं हैं। इससे मच्छर के काटने से होने वाली बीमारियों से जुड़े दावों में बढ़ोतरी होती है। इन दिनों संक्रामक बीमारियों के लिए अस्पताल में भर्ती होने के मामले बढ़ गए हैं, जिनका पहले घर पर इलाज किया जाता था। यह एक पॉजिटिव डवलपमेंट है, क्योंकि प्रोफेशनल सपोर्ट प्राप्त करना हमेशा अच्छा होता है। इससे बीमारियों से होने वाली मौतों की संख्या में कमी आती है।

