नई दिल्ली, May 24 : रुपये में स्थिरता और कंपनियों की आय में सुधार की संभावना आने वाले समय में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs को दोबारा Indian Stock Market की ओर आकर्षित कर सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आय वृद्धि मजबूत होती है और रुपये पर दबाव कम होता है, तो विदेशी निवेशकों की बिकवाली थम सकती है।
May महीने में अब तक FIIs ने ₹. 30,374 करोड़ की बिकवाली की है। इसके साथ ही वर्ष 2026 में अब तक कुल विदेशी बिकवाली ₹. 2,22,343 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा वर्ष 2025 की कुल बिकवाली ₹. 1,66,283 करोड़ से भी अधिक है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि FIIs भारत में दोबारा खरीदारी कब शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि लगातार बिकवाली के पीछे कई प्रमुख कारण हैं, जिनमें भारत में कमजोर आय वृद्धि, दूसरे देशों में बेहतर आय संभावनाएं, अमेरिका में ऊंची बॉन्ड प्रतिफल दरें और रुपये की कमजोरी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन कारणों में से कुछ परिस्थितियां भारत के पक्ष में बदलनी होंगी, तभी विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में फिर से खरीदार बन सकते हैं। हालांकि बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के बावजूद FIIs छोटे और मझोले शेयरों में निवेश कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशकों के लिए आय वृद्धि सबसे बड़ा कारक बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार चौथी तिमाही के नतीजों में आय सुधार के शुरुआती संकेत दिखाई दिए हैं।
वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DIIs ने पिछले सप्ताह लगातार पांचों कारोबारी सत्रों में खरीदारी जारी रखी। इस दौरान घरेलू निवेशकों का कुल शुद्ध निवेश ₹. 16,950 करोड़ रहा। पिछले सप्ताह Nifty और Sensex में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। निवेशकों के बीच अनिश्चितता और अलग-अलग क्षेत्रों से मिले मिश्रित संकेतों के कारण बाजार कभी बढ़त में तो कभी गिरावट में दिखाई दिया।
इस बीच वैश्विक ब्रोकरेज कंपनी जैफरीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि रुपये की हालिया कमजोरी केवल कच्चे तेल की कीमतों या चालू खाता घाटे की वजह से नहीं है। इसके पीछे घरेलू निवेशकों द्वारा SIP के माध्यम से लगातार शेयर बाजार में किया जा रहा निवेश भी एक बड़ा कारण है। रिपोर्ट के अनुसार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने रुपये पर दबाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

