जनहित, स्वरोजगार और आर्थिक उन्नति को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू की गई पीएम मुद्रा योजना को इसी माह 10 वर्ष पूरे हुए।
मुद्रा योजना में किसी की गारंटी की जरूरत नहीं है। इसके तहत 50 हजार से 20 लाख रुपये तक का लोन लिया जा सकता है। मुद्रा योजना के तहत बीते 10 साल में 53 करोड़ से ज्यादा लोन पास हुए, जिसके तहत लगभग 33 लाख करोड़ रुपये का लोन दिया गया। इसमें लगभग 68 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं और 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के हैं।
इस योजना का लाभ फल-फूल, सब्जी बेचने, चाय की दुकान चलाने वाले से लेकर बुनकर और लघु उद्योग चलाने वाले तक उठा रहे हैं। वे अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। पीएम मुद्रा योजना की वजह से धरातल पर जो सकारात्मक बदलाव आया है, उसे आंकड़ों में मापना मुश्किल है। देश के कोने-कोने में चाहे वह गांव हो या शहर, मुद्रा योजना का फायदा उठाकर लोगों को तरक्की करते देखा जा सकता है।
मुद्रा योजना महिला सशक्तीकरण का भी एक प्रमुख माध्यम बनी है। महिलाएं अब उद्यमी बनने का सपना जी रही हैं। मुद्रा योजना को मातृशक्ति ने हाथों-हाथ लिया है। इससे एक तो महिलाओं में कुछ करने का जज्बा बढ़ा और दूसरे, वे आर्थिक गतिविधियों में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढऩे में सक्षम हुईं। मुद्रा लोन में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने वाले राज्यों ने उनके नेतृत्व वाले एमएसएमई के माध्यम से काफी रोजगार सृजन हुए।
मुद्रा योजना से उन्होंने अपना व्यवसाय बढ़ाया है और अन्य महिलाओं को रोजगार दिया है। यह एक बड़ा बदलाव है।
मुद्रा योजना से छोटे शहरों और गांवों तक कारोबार बढ़ा है। ‘आउटकम्स आफ मोदीनामिक्स 2014-24’ नामक रिपोर्ट के अनुसार 2014 से हर साल कम से कम 5.14 करोड़ नए रोजगार शुरू हुए, जिसमें अकेले मुद्रा योजना ने 2014 से प्रति वर्ष औसतन 2.52 करोड़ स्थायी रोजगार जोड़े।

