डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती आज उनके जन्म दिवस पर भारत समेत पूरे विश्व में मनाई जाएगी। इस दिन को समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंंकि जीवन भर समानता के लिए संघर्ष करने वाले आंबेडकर को समानता और ज्ञान के प्रतीक माना जाता है। डॉ. आंबेडकर एक महान विचारक, समाज सुधारक और भारतीय संविधान के निर्माता थे। यह दिवस उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। उन्होंने हमेशा जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज को बदलने की सबसे बड़ी ताकत है। इसी सोच के तहत उन्होंने 1923 में बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना की, जो शिक्षा और सामाजिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम था। वह भारत के सामाजिक और कानूनी बदलावों में केंद्रीय भूमिका निभाने वाले महान विचारक थे। उन्होंने समानता, सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए जीवनभर संघर्ष किया। डॉ. आंबेडकर का शिक्षा के प्रति समर्पण अद्वितीय था। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की और अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। वे कई भाषाओं के ज्ञाता थे और अनेक विषयों में गहरी समझ रखते थे। वर्ष, 1947 में भारत की आजादी के बाद वे देश के पहले कानून मंत्री बने। बाद में उन्होंने जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता के विरोध में बौद्ध धर्म अपनाया और लाखों लोगों को भी इससे जोडक़र सामाजिक बदलाव का मार्ग प्रशस्त किया। आंबेडकर जयंती पर उनके योगदान को याद करते हुए हमें उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।

