भारत में सभी त्योंहारों को बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। इन सभी में शुभ त्योंहारों में से एक है फुलेरा दूज। जो आज के दिन मनाया जाएगा। इसका शाब्दिक अर्थ है फूल,यह धारणा है कि भगवान कृष्ण इस दिन फूलों से खेलते हैं, जिससे यह त्योंहार लोगों के लिए खुशी और आनंद लेकर आता है। होली से कुछ दिन पहले मनाया जाने वाला यह त्यौहार एक भाग्यशाली दिन माना जाता है, जो दोषों और हानिकारक प्रभावों से अप्रभावित रहता है। इसलिए, यह वर्ष, 2025 की सबसे शुभ विवाह तिथियों में से एक है। इस तिथि का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत है। इस शुभ दिन के सभी अनुष्ठानों को ईमानदारी और भक्ति के साथ करने से समृद्धि, खुशी और आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसके अलावा यह तिथि बसंत की शुरुआत, विकास, नवीनीकरण और प्रचुरता के मौसम को दिखाती है। यह भी माना जाता है कि जैसे प्रकृति अपनी नींद से जागती है और फूल खिलते हैं। फुलेरा दूज हमें जीवन के चक्रीय चरित्र और सृष्टि की सुंदरता की याद दिलाता है। पौरोणिक कथाओं में कहा गया है कि एक बार भगवान कृष्ण अपनी व्यस्तता के कारण लंबे समय तक अपनी प्रिय राधा रानी से नहीं मिल सके। इस कारण से राधा दुखी थीं। राधा के दुखी होने से प्रकृति की सारी हरियाली खत्म होने लगी। जब भगवान कृष्ण ने प्रकृति की यह हालत देखी तो वे आखिरकार राधा जी से मिलने गए। भगवान कृष्ण से मिलते ही राधा रानी और गोपियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। राधा रानी और गोपियों की खुशी ने प्रकृति की हरियाली वापस ला दी। सभी को खुश देखकर भगवान कृष्ण खुश हुए और उन्होंने एक फूल तोडक़र अपनी प्रिय राधा रानी पर फेंका। बदले में राधा जी ने भी श्री कृष्ण पर फूल की बरसात कर दी, फिर तो गोपियों ने भी एक-दूसरे पर फूल बरसाने शुरू कर दिए। सभी ने फूलों की होली खेलना शुरू कर दिया। चूंकि यह सब फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ था, इसलिए हर साल फूलों की होली यानी फुलेरा दूज मनाई जाती है। हर साल यह शुभ दिन बसंत पंचमी और होली के बीच आता है। फुलेरा दूज का पूरा दिन अबूझ मुहूर्त होता है। इस दिन संपत्ति की खरीद, व्यापार शुरू करना, विवाह आदि जैसे कार्यों को करने के लिए शुभ दिन माना जाता है।

