आज दुनिया में एआई का हो-हल्ला मचा हुआ है। पर इसका अर्थ भी हर किसी को समझना जरूरी है। जहां तक समझ आता है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मशीनों द्वारा मानव संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं का अनुकरण है। यह प्रक्रियाओं को स्वचालित करता है और आईटी सिस्टम में संज्ञानात्मक कंप्यूटिंग को लागू करके मानव बुद्धि को अनुकरण करना इसका लक्ष्य है। वैसे तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विगत कई दशकों से चर्चा के केंद्र में रहा है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इसका हो-हल्ला बहुत ज्यादा हो रहा है। पिछले दिनों ही पेरिस में हुए दो दिवसीय एआई एक्शन समिट ने जहां आने वाले दौर के लिए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस पर फोकस किया गया, वहीं यह भी साफ कर दिया कि इस मामले में होड़ के बावजूद सभी देशों का आपसी तालमेल बनाए रखते हुए सावधानी से आगे बढऩा जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न केवल फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के साथ इस शिखर बैठक की सह-अध्यक्षता की बल्कि अगली शिखर बैठक की मेजबानी करने की पेशकश भी करते हुए बता दिया कि भारत इस पहल को कितनी गंभीरता से लेता है। आज दुनिया तकनीक के माध्यम से तेजी से बदल रही है। विकास को गति देने और लोगों को बेहतर सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और भूमंडलीकरण ने जहां विकास की गति को तेज़ किया है, वहीं इसने कई नई समस्याओं को भी जन्म दिया है, जिनका समाधान करने के लिए नित नए प्रस्ताव सामने आते रहते हैं। जहां वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनेकानेक लाभ गिनाते हैं, वहीं वे यह भी मानते हैं कि इसके आने से सबसे बड़ा नुकसान मनुष्यों को ही होगा, क्योंकि उनका काम मशीनों से लिया जाएगा, जो स्वयं ही निर्णय लेने लगेंगी और अगर उन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो वे मानव सभ्यता के लिए हानिकारक हो सकते हैं। ऐसे में इनके इस्तेमाल से पहले लाभ और हानि दोनों के संतुलन की आवश्यकता होगी। जहां तक विकसित होती तकनीक वाली इस फील्ड में हर इनोवेशन की अपनी सीमाएं भी होती हैं, जिनका ध्यान रखने की जरूरत होती है। खासकर सुरक्षा से जुड़े पहलू को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इन सभी बातों को लेकर चीनी इनोवेशन को भी कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

