सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और सर्दियों के अंत तथा वसंत की शुरुआत का प्रतीक मकर संक्रांति आज मनाई जाएगी। मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व अत्यंत गहन है। जब सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं। उत्तरायण को आध्यात्मिक उन्नति का काल माना गया है। इस समय किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल शीघ्र प्राप्त होता है। कई शास्त्रों में भी वर्णित है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती अथवा किसी भी पवित्र जल स्रोत में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का क्षय होता है। साथ ही ब्राह्मणों, साधुओं और दीन-दु:खी, निर्धन, जरूरतमंद लोगों को दान देने से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वहीं मकर संक्रांति जानकारी कई पौराणिक कथाओं में मिलता है। महाभारत के अनुसार भीष्म पितामह ने उत्तरायण काल की प्रतीक्षा करते हुए अपने प्राण त्यागे थे। मान्यता है कि उत्तरायण में देह त्याग करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी कारण इस काल को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। कृषि प्रधान भारत में मकर संक्रांति का विशेष सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। यह पर्व नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। किसान इस दिन प्रकृति और सूर्य देव का आभार व्यक्त करते हैं। सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा, सत्य और तप का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस दिन उनकी विशेष आराधना की जाती है। यह दिन सूर्य देव की पूजा के लिए समर्पित है, जो जीवन और ऊर्जा का स्रोत है। मकर संक्रांति के दिन लोग अपने घरों को साफ-सुथरा व नए कपड़े पहनते हैं और विशेष व्यंजन बनाते हैं। इस दिन लोग अपने प्रियजनों को तिल और गुड़ के लड्डू बांटते हैं, जो स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक है। मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की भी परंपरा है, जो सूर्य की ऊंचाई का प्रतीक है।

